मनमोहन के ‘खास’ और कानपुर की आवाज ‘शांत’: पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का निधन
Shriprakash Jaiswal Death: कानपुर से 3 बार MP और मनमोहन सरकार में कोयला मंत्री रहे श्रीप्रकाश जायसवाल का इलाज के दौरान शुक्रवार की शाम को निधन हो गया। 81 वर्षीय जायसवाल काफी दिनों से बीमार चल रहे थे।
- Written By: सौरभ शर्मा
पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का निधन (फोटो- सोशल मीडिया)
Shriprakash Jaiswal Death: उत्तर प्रदेश की राजनीति और कांग्रेस पार्टी के लिए शुक्रवार की शाम एक बेहद दुखद खबर लेकर आई। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कानपुर की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे श्रीप्रकाश जायसवाल का निधन हो गया है। मनमोहन सिंह की सरकार में कोयला मंत्रालय जैसी अहम जिम्मेदारी संभालने वाले जायसवाल ने 81 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन से न केवल कांग्रेस पार्टी बल्कि पूरे कानपुर में शोक की लहर दौड़ गई है, क्योंकि उन्होंने इस शहर का प्रतिनिधित्व संसद में तीन बार किया था।
तबीयत बिगड़ने के बाद शुक्रवार को उन्हें सबसे पहले किदवई नगर स्थित एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। वहां उनकी हालत में सुधार न होने पर उन्हें तुरंत कानपुर के कार्डियोलॉजी संस्थान रेफर कर दिया गया। कार्डियोलॉजी के हार्ट विभाग में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन शाम को उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष पवन गुप्ता ने उनके निधन की पुष्टि की है। जायसवाल करीब चार दशकों तक सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे और उनका जाना एक युग के अंत जैसा है।
मेयर से मिनिस्टर तक का सफर
श्रीप्रकाश जायसवाल का जन्म 25 सितंबर 1944 को कानपुर में हुआ था और उनकी शुरुआती पढ़ाई यहीं के बीएनएसडी इंटर कॉलेज से हुई थी। उनका राजनीतिक कद कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह 1989 में कानपुर शहर के मेयर बने और फिर दिल्ली की राजनीति का रुख किया। उन्होंने 1999, 2004 और 2009 में लगातार तीन बार कानपुर से लोकसभा चुनाव जीता। मनमोहन सिंह की सरकार में उन्होंने कोयला मंत्री के अलावा गृह राज्य मंत्री के रूप में आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाए थे।
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आखिरी वक्त तक कांग्रेस के सिपाही
श्रीप्रकाश जायसवाल के परिवार में उनके दो बेटे, एक बेटी और दो पोते हैं। उनकी शादी 1967 में माया रानी जायसवाल से हुई थी। वह अपने सिद्धांतों के पक्के थे। हाल ही में लोकसभा चुनाव से पहले जब उनके भाई प्रमोद जायसवाल ने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था, तब कयास लगाए जा रहे थे कि शायद श्रीप्रकाश जायसवाल भी पाला बदल लेंगे। लेकिन तमाम अटकलों को खारिज करते हुए वे अंत तक कांग्रेस में ही बने रहे। राजनीति के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी उनकी गहरी रुचि थी, जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।
