

Navbharat Conclave Shivraj Singh Chouhan Rural Development India: केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में आयोजित 'नवभारत कॉन्क्लेव' में देश के विकास को लेकर एक बड़ा विजन साझा किया है। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत' का संकल्प तब तक पूरा नहीं हो सकता, जब तक हमारे गांव समृद्ध और आत्मनिर्भर नहीं बनते। मंत्री चौहान के अनुसार, भारत की आत्मा गांवों में बसती है और देश की लगभग 70% आबादी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।
चौहान ने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले 18-20 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति में व्यापक सुधार हुआ है। गांवों में अब पक्के मकानों की संख्या बढ़ी है, परिवारों के पास अपनी गाड़ियां हैं और उनकी कुल आमदनी में भी इजाफा हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार हो रहा है, लेकिन अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना बाकी है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकना है। मंत्री जी ने बताया कि लोग अक्सर बेहतर नौकरियों और 'लिविंग स्टैंडर्ड' की तलाश में शहरों का रुख करते हैं। इसे रोकने के लिए सरकार गाँवों में ही शहरों जैसी सुविधाएं और बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने की दिशा में तेज़ी से काम कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब गांवों में उच्च स्तरीय सुविधाएं मिलेंगी, तो लोग वहीं रहना पसंद करेंगे।
ग्रामीण भारत के विकास में कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को याद करते हुए बताया कि 'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना' ने गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक काम किया है।
सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले हर घर में रसोई गैस, सोलर पैनल और नल का कनेक्शन हो। सोलर पैनल लगाने के पीछे का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को 'फ्री बिजली' उपलब्ध कराना है, जिससे उनकी आर्थिक बचत हो सके। इसके साथ ही नल जल योजना के माध्यम से हर घर तक साफ पीने का पानी पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया गया है।
मंत्री ने स्वीकार किया कि अच्छी शिक्षा की चाह में कई ग्रामीण परिवार शहरों में घर ले लेते हैं, जिसे उन्होंने एक सकारात्मक बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए शहरों की ओर जाना बुरा नहीं है, लेकिन सरकार का प्रयास है कि गांवों के स्कूलों का स्तर भी इतना सुधारा जाए कि बुनियादी शिक्षा के लिए पलायन न करना पड़े।
चौहान ने उन दिनों को याद किया जब कनेक्टिविटी न होने के कारण लोग गांवों से निकलकर कस्बों में बसने लगे थे। बरसात के मौसम में बीमारों को खटिया पर लादकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता था। लेकिन सड़कों के निर्माण के बाद लोगों ने वापस गाँवों का रुख करना शुरू कर दिया है।
मंत्री ने कहा कि केवल सड़क ही काफी नहीं है, बल्कि गांवों को अच्छे स्कूल, साफ पानी, इलाज की व्यवस्था और बेहतर आंतरिक सड़कों की भी आवश्यकता है। सरकार अब 'स्वावलंबी गांवों' के निर्माण पर ध्यान दे रही है जो सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विजनरी लीडर बताया जिनके मार्गदर्शन में गांवों को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
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