रमजान में स्कूलों की बदली टाइमिंग…भड़की भाजपा, बोली-हिंदू त्योहारों पर क्यों नहीं छूट?
Karnataka Urdu School : कर्नाटक सरकार ने रमजान माह को देखते हुए उर्दू मीडियम जूनियर, सीनियर और हाईस्कूलों के समय में बदलाव किया है। इस पर विवादित शुरू हो गया है। भाजपा ने प्रतिक्रिया दी है।
- Written By: रंजन कुमार
उर्दू स्कूल में पढ़ते विद्यार्थी। इमेज-सोशल मीडिया
Karnataka News : कर्नाटक में रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत से पहले स्कूलों के समय में किए गए बदलाव ने राज्य की सियासत में नया उबाल पैदा कर दिया है। 17 फरवरी से शुरू हो रहे रमजान को देखते हुए राज्य सरकार ने उर्दू मीडियम स्कूलों के समय को घटाने का निर्णय लिया है। इस पर भारतीय जनता पार्टी ने तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया है।
उर्दू और अल्पसंख्यक भाषा स्कूल निदेशालय की तरफ से जारी निर्देश के अनुसार रमजान के दौरान कर्नाटक के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त उर्दू मीडियम स्कूलों (जूनियर, सीनियर और हाईस्कूल) के समय में बदलाव किया गया है। अब ये स्कूल सुबह 8 बजे खुलेंगे और दोपहर 12:45 बजे बंद हो जाएंगे। यह व्यवस्था रमजान की शुरुआत से 20 मार्च तक प्रभावी रहेगी। प्रशासन का तर्क है कि रोजे के दौरान छात्रों और स्टाफ की सुविधा के लिए यह कदम उठाया गया है।
सिर्फ एक धर्म के लिए ही क्यों?
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे कांग्रेस की वोट बैंक की राजनीति करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कर्नाटक सरकार हिंदू त्योहारों, जैसे नवरात्रि या दीपावली के दौरान भी छात्रों और शिक्षकों को ऐसी कोई रियायत देती है? पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस संविधान के अनुरूप निष्पक्ष व्यवहार करने के बजाय एक विशेष समुदाय को प्राथमिकता दे रही है, जो समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
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कांग्रेस का पलटवार
भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए कर्नाटक के मंत्री संतोष लाड ने इसे गैर-जरूरी विवाद बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास विकास के बड़े मुद्दों पर बात करने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वे हमेशा उर्दू, मुसलमान, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे विषयों को बीच में लाते हैं। लाड ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बात करनी चाहिए और जनता को यह बताना चाहिए कि वे पड़ोसी देशों को किन शर्तों पर ईंधन दे रहे हैं।
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केरल और बिहार में भी समय हो चुके हैं बदलाव
भारत में शिक्षा का अधिकार (RTE) स्कूलों के लिए कार्य घंटों का निश्चित पैमाना तय करता है। ऐसे में समय में कटौती को लेकर अक्सर प्रशासनिक और कानूनी बहस छिड़ती रही है। इससे पहले भी केरल और बिहार जैसे राज्यों में जुमे (शुक्रवार) या रमजान के समय में बदलाव को लेकर विवाद हो चुके हैं, जो अंततः धर्मनिरपेक्षता बनाम धार्मिक स्वतंत्रता की बहस का रूप ले लेते हैं।
