पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ (फोटो- सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने केंद्र सरकार को एक पत्र भेजा है, जिसमें उनसे तत्काल बंगला खाली कराने की मांग की गई है। यह वही बंगला है जो लुटियंस दिल्ली के कृष्ण मेनन मार्ग पर स्थित है और सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के आधिकारिक आवास के तौर पर निर्धारित है। चंद्रचूड़ नवंबर 2024 में सेवानिवृत्त हो गए थे, लेकिन आठ महीने बाद भी वह इस बंगले में रह रहे हैं, जिससे सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने आपत्ति जताई है।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिस अवधि के लिए उन्हें बंगले में रहने की अनुमति दी गई थी, वह 21 मई 2025 को खत्म हो चुकी है। इसके अतिरिक्त, 2022 के नियम 3B के तहत जो छह महीने की रियायत दी गई थी, वह भी 10 मई को समाप्त हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को भेजे गए इस पत्र में कोर्ट के हाउसिंग पूल में बंगले को वापस सौंपने की मांग की गई है।
क्यों नहीं खाली किया गया बंगला
पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वह पहले ही केंद्र सरकार से वैकल्पिक किराए का आवास ले चुके हैं, लेकिन वह आवास लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं था और अब वह उसे दोबारा रहने लायक बनाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन इस स्थिति से पूरी तरह अवगत है और उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा है।
यह भी सामने आया है कि उनके बाद बने दोनों मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना और वर्तमान सीजेआई जस्टिस बीआर गवई ने सुप्रीम कोर्ट का आधिकारिक बंगला नहीं लिया और अपने पहले से आवंटित सरकारी बंगलों में ही रहना जारी रखा।
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क्या है नियम और प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों को कुछ समय के लिए सरकारी आवास में रुकने की अनुमति होती है। यह अवधि अधिकतम छह महीने की होती है, जिसे विशेष परिस्थितियों में थोड़ा बढ़ाया जा सकता है। लेकिन इस मामले में यह बढ़ी हुई अवधि भी अब समाप्त हो चुकी है, जिससे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि बंगला खाली कराया जाए।