सत्ता या लोकप्रियता नहीं, बल्कि RSS का लक्ष्य है राष्ट्र निर्माण; जानिए धर्म परिवर्तन पर क्या बोले मोहन भागवत
RSS Chief Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि संघ का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक सत्ता हासिल करना नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र पुनरुत्थान है।
- Written By: स्निग्धा श्रीवास्तव
मोहन भागवत (सोर्स- सोशल मीडिया)
RSS Chief Mohan Bhagwat Statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत एक बार फिर अपने बयान की वजह से चर्चा में है। मोहन भागवत ने RSS को लेकर बड़ा बयान दिया है। मोहन भागवत नें कहा कि अक्सर संघ को गलत समझा जाता है। लेकिन आरएसएस दुनिया की सबसे बड़ी स्वैच्छिक संगठन है। जिसका मकसद किसी दबाव में समूह का निर्माण करना या सार्वजनिक जीवन के हर क्षेत्र में अपना प्रभाव डालना नहीं है। बल्कि संघ का मकसद समाज को संगठित करना है।
समाज को संगठित करना है उद्देश्य
केरल के तिरुवनंतपुरम में RSS के शताब्दी समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संघ का मुख्य मकसद राष्ट्र के पुनरुत्थान के लिए समाज को संगठित करना हैं। संघ की स्थापना राजनीतिक सत्ता पाने के लिए या लोकप्रियता के लिए नहीं की गई थी।
RSS के शताब्दी समारोह में मोहन भागवत ने कहा कि संघ की शुरुआत किसी एक विशेष समुदाय के विरोध में नहीं की गई थी। ना ही सत्ता या लोकप्रियता हासिल करना है। आरएसएस की शुरुआत एक बड़े राष्ट्रीय उद्देश्य को पूरा करने के लिए किया गया है। RSS का उद्देश्य देश के कल्याण एवं पुनरुत्थान के लिए जरूरी हर चीज में योगदान देने के लिए किया गया है।
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लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने के लिए की गई स्थापना
भागवत ने कहा कि इसके संस्थापक के बी हेडगेवार ने देखा कि भारत बार-बार विदेशी ताकतों के आगे गुलाम इसलिए हुआ, क्योंकि समाज के अंदर कमजोरियां और विभाजन की प्रवृत्ति थी। इसलिए वह एक ऐसा संगठन चाहते थे जिसमें लोग एक एकजुट, संगठित और अनुशासित हो। इसलिए उन्होंने समाज को संगठित करने, मजबूत बनाने और लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने के लिए इस संगठन की स्थापना की।
किसी धार्मिक समुदाय के खिलाफ नहीं है RSS
मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस किसी धार्मिक समुदाय के खिलाफ नहीं है। इसका मतलब हिंदू बनाम मुस्लिम या ईसाई नहीं है। उन्होंने कहा कि यह एक विचार पर आधारित है कि दुनिया एक परिवार है जिसमें तमाम विविधताओं के बावजूद सभी सौहार्द के साथ मिल-जुलकर रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि संघ मूल रूप से एक ही काम करता है। वह ऐसे लोगों को तैयार करना चाहता है, जो ईमानदार, नि:स्वार्थ, अनुशासित होकर समाज के प्रति समर्पित हों।
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1.30 लाख से अधिक स्वयंसेवक कर रहे सेवा कार्य
मोहन भागवत ने कहा कि संगठन से देश भर में 1.30 लाख से अधिक स्वयंसेवक जुड़े है और सेवा कार्यों में लगे हुए हैं। लगभग हर क्षेत्र में, स्वयंसेवक अलग-अलग संस्थाओं और पहलों के जरिये समाज सेवा का काम कर रहे है। उन्होंने कहा कि हमारा काम समाज का निर्माण करना, संगठित करना और जागरूक करना है।
स्वेच्छा से कोई दूसरा धर्म अपनाने में RSS कोई आपत्ति नहीं
ईसाइयों पर हुए हमलों को लेकर भागवत ने कहा कि ईसाई सदियों से भारत में सुरक्षित रहे हैं। वे भी भारतीय समाज का हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदू समुदाय स्वभाव से ही सबको साथ लेकर चलता है। आरएसएस न तो हिंसा में कभी शामिल होता है और न ही हिंसा का समर्थन करता है।
धर्म परिवर्तन को लेकर भागवत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से कोई दूसरा धर्म अपनाता है तो इससे आरएसएस को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन जब धर्म परिवर्तन के पीछे लालच, जबरदस्ती या दूसरे व्यक्ति के धर्म और परंपराओं का अपमान किया जाता है तो यह गलत है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय पर लोगों को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। इसका समाधान कानूनी तरीके से किया जाना चाहिए।
