गणतंत्र दिवस 2026 की परेड, फोटो- सोशल मीडिया
Republic Day 2025: राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 26 जनवरी की रिहर्सल पूरे उत्साह के साथ शुरू हो गई है। इस बार की परेड एक ऐतिहासिक और भावनात्मक दृश्य की गवाह बनेगी, क्योंकि पहली बार भारतीय सेना के ‘मूक योद्धा’ (पशु-दस्ता) इतने बड़े और संगठित रूप में दुनिया के सामने अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे।
गणतंत्र दिवस 2026 की परेड इस मायने में खास होने वाली है कि इसमें केवल मशीनी ताकत ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना के वफादार पशु-साथियों का पराक्रम भी दिखाई देगा। सूत्रों के अनुसार, रिहर्सल के दौरान इन मूक योद्धाओं का अनुशासन और तालमेल दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है,। इस विशेष दस्ते में दो बैक्ट्रियन ऊंट, चार जांस्कर पोनी, चार शिकारी पक्षी (रैप्टर्स) और 16 सेना के कुत्ते (K9 दस्ता) शामिल किए गए हैं। यह दस्ता न केवल सेना की सामरिक विविधता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि देश की रक्षा में इन बेजुबानों का योगदान कितना अतुलनीय है।
परेड में थलसेना के पशु-दस्ते की अगुवाई दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट करेंगे। ये ऊंट मुख्य रूप से लद्दाख और मध्य एशिया के चुनिंदा हिस्सों में पाए जाते हैं। सेना के बेड़े में इनकी एंट्री 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ हुई गलवान झड़प के बाद हुई थी। इन्हें सेना की लॉजिस्टिक विंग का हिस्सा बनाने के लिए विशेष मिलिट्री ट्रेनिंग दी गई है।
इन ऊंटों की खासियत यह है कि ये 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई और भीषण ठंड में भी आसानी से काम कर सकते हैं। ये 250 किलो तक का सैन्य साजो-सामान ढोकर लंबी दूरी तय करने में सक्षम हैं, जिससे दुर्गम इलाकों में रसद पहुंचाना आसान हो जाता है।
बैक्ट्रियन ऊंटों के ठीक पीछे कदम से कदम मिलाकर लद्दाख की स्वदेशी नस्ल ‘जांस्कर पोनी’ चलेंगी। आकार में छोटी दिखने वाली ये पोनी असल में ताकत और सहनशक्ति की मिसाल हैं। ये माइनस 40 डिग्री सेल्सियस जैसे हाड़ कंपा देने वाले तापमान में भी 40 से 60 किलो वजन लेकर चल सकती हैं। साल 2020 से ये सियाचिन जैसे दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्रों में सैनिकों के साथ सेवा दे रही हैं और एक दिन में लगभग 70 किलोमीटर तक गश्त करने का रिकॉर्ड रखती हैं।
आधुनिक युद्ध कौशल का परिचय देते हुए परेड में चार शिकारी पक्षी (रैप्टर्स) भी शामिल होंगे,। ये पक्षी सेना की ‘स्मार्ट’ सोच का प्रतीक हैं। इनका मुख्य कार्य हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करना और दुश्मन के छोटे ड्रोनों की निगरानी करना है। ये रैप्टर्स एंटी-ड्रोन अभियानों में सेना के लिए एक महत्वपूर्ण ढाल साबित हो रहे हैं, जिससे सैन्य ऑपरेशन्स पहले से अधिक सुरक्षित हो गए हैं।
परेड का सबसे मार्मिक हिस्सा K9 दस्ता होगा, जिसमें 10 भारतीय नस्ल के कुत्ते और 6 पारंपरिक सैन्य कुत्ते शामिल होंगे,। आत्मनिर्भर भारत की पहल के तहत अब सेना मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बई और राजापलायम जैसी देसी नस्लों को बड़े पैमाने पर शामिल कर रही है।
इन कुत्तों को मेरठ स्थित रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स (RVC) केंद्र में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। ये मूक योद्धा आतंकवाद विरोधी अभियानों, बम निरोधक कार्यों और आपदा राहत में सैनिकों की जान बचाने के लिए खुद को जोखिम में डाल देते हैं। परेड में उनकी मौजूदगी स्वदेशी क्षमताओं पर भारत के बढ़ते भरोसे का प्रतीक है।
जब 26 जनवरी 2026 को यह पशु-दस्ता कर्तव्य पथ से गुजरेगा, तो यह दुनिया को याद दिलाएगा कि भारत की सुरक्षा सिर्फ अत्याधुनिक मिसाइलों और टैंकों तक सीमित नहीं है। सियाचिन की बर्फीली चोटियों से लेकर रेगिस्तान की तपती रेत तक, इन पशुओं ने खामोशी से अपना फर्ज निभाया है। ये केवल सहायक नहीं, बल्कि भारतीय सेना के सच्चे और वीर साथी हैं।