TATA ग्रुप को बड़ा झटका, एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा

Tata Sons Chairman Resignation: एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है, कहा जा रहा है कि उनका कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होने वाला था।
tata sons chairman n chandrasekaran
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरनफोटो (सोर्स- सोशल मीडिया)
Updated on

Tata Sons Leadership Transition: एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उनका लगभग एक दशक लंबा कार्यकाल अचानक खत्म हो गया है। सूत्रों के मुताबिक 63 साल के चंद्रशेखरन ने टाटा संस बोर्ड को अपने फैसले के बारे में बता दिया है। वह फरवरी 2027 तक चेयरमैन के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा होने तक पद पर बने रहेंगे। उन्हें 2017 में टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था और 2022 में दूसरा कार्यकाल दिया गया था।

माना जा रहा है कि चंद्रशेखरन के इस तरह अचानक हटने से देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने पर बुरा असर पड़ेगा। वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी कई टाटा कंपनियों के चेयरमैन हैं। चंद्रशेखरन का यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली बैठक और टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के वोटिंग के तरीके को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच आया है।

एजीएम से पहले इस्तीफा और अनिश्चितता

कंपनी के नोटिस के अनुसार, आगामी 18 अगस्त को होने वाली AGM में शेयरहोल्डर्स को रोटेशन से रिटायर होने वाले डायरेक्टर के तौर पर चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर मतदान करना था। लेकिन उनकी दोबारा नियुक्ति को लेकर ग्रुप के अंदर काफी समय से गंभीर कूटनीतिक गतिरोध चल रहा था।

यह गंभीर अनिश्चितता एन चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के बीच मतभेदों के कारण पैदा हुई थी। दरअसल टाटा संस के बोर्ड ने फरवरी में चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर फैसला टाल दिया था, क्योंकि नोएल टाटा ने नए बिजनेस के परफॉर्मेंस पर सवाल उठाए थे।

टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस में मतभेद

बताया जा रहा है कि टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद केवल दोबारा नियुक्ति तक ही सीमित नहीं थे। दोनों पक्षों के बीच बोर्ड में प्रतिनिधित्व, ग्रुप की व्यापारिक रणनीति और माइनॉरिटी शेयरहोल्डर शापूरजी पालोनजी ग्रुप के प्रस्तावित एग्जिट को लेकर भी बड़ी असहमति बनी हुई थी।

इस आपसी विवाद के कारण ही हाल ही में टाटा संस के एक बड़े डायरेक्टर को भी बोर्ड से बाहर होना पड़ा था। इसके साथ ही सर रतन टाटा ट्रस्ट को फिलहाल चैरिटी कमिश्नर ने कोई भी बड़ा व्यापारिक फैसला लेने से रोक रखा है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया और भी जटिल हो गई है।

tata sons chairman n chandrasekaran
पुतिन के दूत बने पूर्व CJI चंद्रचूड़, क्रेमलिन ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, रूस-यूक्रेन के बीच सुलझाएंगे ये विवाद

कूटनीतिक गतिरोध और व्यापारिक प्रभाव

नोएल टाटा, डेरियस खंबाटा और जहांगीर जहांगीर समेत कई ट्रस्टियों ने चैरिटी कमिश्नर से इस एजीएम में शामिल होने की इजाजत मांगी है। उनका मानना है कि ट्रस्ट के हितों की रक्षा के लिए एजीएम में उनकी उपस्थिति बहुत जरूरी है, लेकिन चैरिटी कमिश्नर की मंजूरी पर फैसला आना बाकी है।

ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारियों ने देश के इस प्रतिष्ठित व्यापारिक घराने में बढ़ती अनिश्चितता पर गहरा दुख जताया है। उनका कहना है कि फैसले लेने वाले सिस्टम में गतिरोध के कारण ग्रुप के बिजनेस पर असर पड़ रहा है, इसलिए वोटिंग अधिकारों का इस्तेमाल हथियार की तरह नहीं होना चाहिए।

Navbharat Live
navbharatlive.com