'राहुल और राजा..,' राहुल के पीएम बनने पर अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान, जानें क्या बोले शंकराचार्य?

Shankaracharya Avimukteshwaranad on Rahul Gandhi: मुंबई में शंकराचार्य अवुमुक्तेश्वरानंद ने न केवल रामभद्राचार्य और प्रेमानंद विवाद पर टिप्पणी की बल्कि भारत के पीएम पद को लेकर बड़ा बयान दिया है।
rahul-gandhi-pm-post-swami-avimukteshwaranand-reaction
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Shankaracharya Avimukteshwaranad on PM: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार को महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई पहुंचे। यहां उन्होंने न केवल रामभद्राचार्य और प्रेमानंद विवाद पर टिप्पणी की बल्कि भारत के प्रधानमंत्री पद को लेकर बड़ा बयान दिया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज से जब मुंबई में रामभद्राचार्य और प्रेमानंद विवाद को लेकर पूछा गया कि हिंदू संतों में युद्ध जैसी स्थिति क्यों है, जहां सब एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, तो उन्होंने कहा, "संतों में कोई विवाद नहीं है। संत नियमित रूप से चर्चा करते रहते हैं।

प्रतिदिन शस्त्र अभ्यास होता है: शंकराचार्य

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आगे कहा कि यहां तो रोजाना वाद-विवाद होता है। अगर आप सेना में जाते हैं, तो प्रतिदिन शस्त्र अभ्यास होता है। इसलिए लड़ाई नहीं होती। यही हमारा अभ्यास है। जब कोई विरोधी सामने आएगा, तो हम जवाब कैसे देंगे?

उन्होंने आगे कहा कि अगर हम आपस में लड़कर अपने तर्कों की परीक्षा नहीं लेंगे, तो हम विरोधियों को जवाब नहीं दे पाएंगे। तरकश के तीरों की परीक्षा तो होनी ही है, यही युद्ध अभ्यास है। हमारे बीच समय-समय पर ऐसा होता रहता है। इसे विवाद नहीं माना जाना चाहिए।

पीएम पद को लेकर दिया बड़ा बयान

इस दौरान जब उनसे राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा किजनता जिसे प्रधानमंत्री बनाती है, वही बनता है। राहुल और राजा नहीं बनते। जनता उसे ही प्रधानमंत्री बनाएगी जिसे वह सही समझेगी।

बता दें कि हाल ही में स्वामी रामभद्राचार्य ने संत प्रेमानंद महाराज पर को लेकर एक टिप्पणी की थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रेमानंद बालक के समान हैं। उन्हें शास्त्रों का ज्ञान नहीं है। उन्होंने प्रेमानंद महाराज को उनके कहे श्लोकों का अर्थ बताने का चैलेंज भी दिया था।

इस चैलेंज को लेकर जब अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज से सवा पूछा गया तो उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि "क्या संस्कृत बोलना ही विद्वता है?" फिलहाल इस मुद्दे पर रामभद्राचार्य ने नरमी अख्तियार कर ली है। उन्होंने कल एक बयान में प्रेमानंद को पुत्रवत बताया था।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com