राहुल गांधी और सुधांशु त्रिवेदी।
BJP On Rahul Gandhi : लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान उस समय जबरदस्त राजनीतिक उबाल आ गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने इस समझौते को भारत माता का सरेंडर करार देते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हितों को अमेरिका के हाथों बेच दिया है।
सदन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इस डील के जरिए भारत की स्वायत्तता से समझौता किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 3% से बढ़ाकर 18% कर दिया, तो भारत सरकार ने अमेरिका के लिए टैरिफ 16% से घटाकर शून्य क्यों कर दिया?
राहुल गांधी ने दावा किया कि यह समझौता भारतीय कपड़ा उद्योग को तबाह कर देगा और जब अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजारों में भर जाएंगे तो देश के किसानों को एक भीषण आर्थिक तूफान का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम की आंखों में डर दिख रहा है। अब अमेरिका यह तय करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे। यह बराबरी की साझेदारी नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण है।
राहुल गांधी के इन आरोपों पर भाजपा ने भी बेहद आक्रामक रुख अपनाया। संसद परिसर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी को कांग्रेस का सबसे समझदार मूर्ख करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता ने संसदीय शिष्टाचार और भाषाई मर्यादा को सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी बिना किसी तथ्य के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं और उनका व्यवहार दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रतीक संसद की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है। उन्होंने साफ किया कि यह ट्रेड डील देश के विकास के लिए है, लेकिन कांग्रेस केवल नकारात्मक राजनीति के जरिए भ्रम फैलाने का काम कर रही है।
#WATCH | Delhi: At a press conference, BJP Spokesperson Sudhanshu Trivedi says, “… Rahul Gandhi, the Leader of the Opposition, seems to believe in spreading venomous lies and then leaving abroad. His behaviour during parliamentary proceedings has been lethargic… The behaviour… pic.twitter.com/p79savPVNI — ANI (@ANI) February 11, 2026
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राहुल गांधी ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि दुनिया इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है और ऐसे में भारत को बराबरी के पार्टनर के रूप में अपनी बात रखनी चाहिए थी। उन्होंने चेतावनी दी कि इस समझौते से भारत की ऊर्जा सुरक्षा अमेरिकी हितों की गुलाम बन जाएगी, जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।