

Punjab Uttarakhand Assembly Elections Early: पंजाब की सियासत में इन दिनों एक नई चर्चा ने हलचल मचा दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय से पहले कराए जा सकते हैं।
वैसे तो पंजाब विधानसभा का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है, लेकिन प्रशासनिक और धार्मिक आयोजनों के चलते अब इन चुनावों को नवंबर 2026 में ही संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है। केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भी समय से पहले चुनाव होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, समय से पहले चुनाव कराने के पीछे दो मुख्य वजहें सामने आ रही हैं। पहली बड़ी वजह 14 जनवरी से शुरू होने वाला 'हरिद्वार कुंभ मेला' है। इस विशाल धार्मिक आयोजन में सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अमले की भारी व्यस्तता रहती है। दूसरी अहम वजह 1 फरवरी से शुरू होने वाला जनगणना का दूसरा चरण है। चुनाव आयोग इन दोनों बड़े कार्यक्रमों के बीच चुनावी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए नवंबर में ही मतदान कराने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
पंजाब के साथ-साथ उत्तराखंड में भी चुनावी सरगर्मी तेज है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड इन तीनों राज्यों में फरवरी से मार्च 2027 के बीच चुनाव होने थे। हालांकि, अब माना जा रहा है कि चुनावी कैलेंडर में बदलाव हो सकता है और उत्तराखंड को भी पंजाब के साथ ही चुनावी मोड में लाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो आने वाला नवंबर उत्तर भारत की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाला है।
इन चर्चाओं के बीच पंजाब में प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने नवंबर के संभावित शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए अपना चुनावी अभियान पहले ही शुरू कर दिया है। दिल्ली की सत्ता में आई हालिया चुनौतियों के बाद पंजाब 'आप' के लिए अस्तित्व की लड़ाई जैसा है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी मोर्चा संभाल लिया है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने अजय माकन की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी गठित की है, जो पंजाब में चुनावी तैयारियों और सांगठनिक बदलावों की देखरेख करेगी।
पंजाब में BJP भी इस बार पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। वहीं, कांग्रेस इंडिया गठबंधन के दलों के साथ मिलकर 'आप' को घेरने का गणित लगा रही है, हालांकि विपक्षी गठबंधन के कई नेताओं के संबंध अरविंद केजरीवाल के साथ काफी मधुर हैं। कुल मिलाकर, पंजाब अब सबसे बड़ा सियासी अखाड़ा बनने जा रहा है, जहां हर दल अपनी गोटियां बिछाने में जुट गया है।