पंजाब की राजनीति में सिद्धू की वापसी, क्या कांग्रेस फिर से झेल पाएगी ‘पाजी’ का तेवर?
नवजोत सिंह सिद्धू एक बार सुर्खियों में हैं। उन्होंने कहा कि वे राजनीति में बदलाव लाने आए हैं, कोई व्यापार करने नहीं। राज्य की सभी पिछली सरकारों पर माफिया के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है।
- Written By: सौरभ शर्मा
नवजोत सिंह सिद्धू (फोटो- सोशल मीडिया)
चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर अंदरखानों में हलचल मचाने को तैयार हैं नवजोत सिंह सिद्धू। कांग्रेस के लिए पहले भी कई बार संकट खड़े कर चुके सिद्धू अब एक बार फिर एक्टिव मोड में दिख रहे हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि वो राजनीति को कोई कारोबार नहीं बल्कि बदलाव का माध्यम मानते हैं। राज्य की मौजूदा स्थिति पर असंतोष जताते हुए उन्होंने पंजाब को माफिया राज से चलने वाला बताया और कहा कि सरकार के पास न तो विकास का कोई विजन है और न ही कोई नीतिगत दिशा। उनके बयानों ने कांग्रेस को फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है।
नवजोत सिंह सिद्धू का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव धीरे-धीरे नजदीक आ रहे हैं और कांग्रेस पंजाब में अपनी खोई सत्ता की वापसी की तैयारी में जुटी है। सिद्धू का दोबारा एक्टिव होना कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि अतीत में उनके बगावती तेवरों का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा था। अब सवाल उठता है कि क्या पार्टी इस बार सिद्धू के साथ तालमेल बैठा पाएगी या फिर पुरानी कहानी दोहराई जाएगी?
‘राजनीति मिशन है, धंधा नहीं’
नवजोत सिंह सिद्धू ने हाल ही में अमृतसर में अपने पुराने अंदाज में वापसी करते हुए साफ कहा कि उन्होंने राजनीति में पैसा कमाने नहीं बल्कि बदलाव लाने के लिए कदम रखा। उनका कहना है कि पिछले 30 वर्षों से पंजाब की हर सरकार किसी न किसी माफिया के इशारे पर चलती रही है, लेकिन वे आज भी अपने सिद्धांतों पर टिके हैं। सिद्धू ने मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि वो राज्य को सिर्फ कर्ज लेकर चला रही है और जनता के लिए कोई ठोस नीति सामने नहीं रखी गई।
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कांग्रेस के लिए फिर चुनौती बन सकते हैं सिद्धू
सिद्धू पहले भी कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन चुके हैं, जब उन्होंने एक ओर अमरिंदर सिंह के खिलाफ खुला मोर्चा खोला और दूसरी ओर चरणजीत सिंह चन्नी से भी लगातार टकराव बनाए रखा। इसके चलते 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को आम आदमी पार्टी से करारी हार मिली। अब जब चुनाव फिर नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस को डर है कि कहीं सिद्धू फिर से पार्टी लाइन से अलग न चलें।
