सत्यपाल मलिक के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख

PM and President expressed Grief : जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया है।
सत्यपाल मलिक के निधन पर राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (सौजन्य सोशल मीडिया)
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PM and President expressed Grief Over The Death of Satyapal Malik: मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन हो गया।  79 वर्षीय सत्यपाल मलिक लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली। सत्यपाल मलिक के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को शोक व्यक्त किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''सत्यपाल मलिक के निधन का समाचार दुखद है। मैं उनके परिवारजनों और समर्थकों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करती हूं।''

पीएम मोदी ने जाताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सत्यपाल मलिक के निधन पर दुख जताते हुए एक्स पर लिखा, ''सत्यपाल मलिक के निधन से दुखी हूं। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और समर्थकों के साथ हैं। ओम शांति।"

2018 में ली थी जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के रुप की शपथ

सत्यपाल मलिक ने जम्मू-कश्मीर के अलावा बिहार, गोवा और मेघालय जैसे राज्यों में राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। 25 जुलाई 1946 को यूपी के बागपत जिले में एक जाट परिवार में सत्यपाल मलिक का जन्म हुआ। मेरठ से उन्होंने अपनी शिक्षा हासिल की। उन्होंने लोहिया की समाजवादी विचारधारा से प्रेरित होकर 1965-66 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। 23 अगस्त 2018 को सत्यपाल मलिक ने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के रूप में शपथ ली। बाद में, वे गोवा चले गए और 18वें राज्यपाल बने। फिर, उन्हें मेघालय का राज्यपाल बनाया गया था।

हिसावदा गांव में हुआ था जन्म

सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई, 1946 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले स्थित हिसावदा गांव के एक जाट परिवार में हुआ। उन्होंने अपनी शिक्षा मेरठ विश्वविद्यालय से पूरी की, जहां से उन्होंने विज्ञान विषय में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और बाद में एलएलबी की डिग्री भी हासिल की। 1968-69 के दौरान वे मेरठ विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में चुने गए, जिसने उनके राजनीतिक जीवन की नींव रखी।

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