चीन से मुकाबले की तैयारी, चौथी बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी S4* का परीक्षण शुरू, कितनी ताकतवर है?
S4 Ballistic Missile Submarine: भारत की चौथी बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी S4* का समुद्री परीक्षण शुरू हो गया है। यह 7,000 टन वजनी पनडुब्बी 3500 किमी से अधिक मारक क्षमता वाली मिसाइलों से लैस है।
- Written By: रंजन कुमार
चौथी बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी S4, इमेज-सोशल मीडिया
Indian Navy: देश की चौथी बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी S4* का समुद्री परीक्षण शुरू हो गया। 7,000 टन वजनी यह पनडुब्बी विशाखापत्तनम बंदरगाह स्थित शिपबिल्डिंग सेंटर (एसबीसी) से बीते सप्ताह समुद्री परीक्षण के लिए रवाना हुई। S4* अरिहंत श्रेणी की बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों की सीरीज की अंतिम पनडुब्बी है। इसमें 3,500 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता वाली 8 परमाणुयुक्त के-4 पनडुब्बी प्रवेशित बैलिस्टिक मिसाइलें (SLBM) हैं। यह चीन और अन्य खतरों के खिलाफ भारत को रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में मददगार होगी।
S4* पनडुब्बी के 80% से अधिक उपकरण स्वदेशी घटकों से बने हैं। जो चारों इकाइयों में सबसे अधिक है। पनडुब्बी का परीक्षण एक साल चलने की उम्मीद है। यह 2027 की शुरुआत तक सेवा में शामिल हो जाएगी। यह पनडुब्बी देश की समुद्र से परमाणु हमले की क्षमता को मजबूत करती है। इससे किसी भी खतरे की स्थिति में अदृश्य रहते हुए जवाब देना संभव होगा।
अब समुद्र में 4 एसएसबीएन
भारत के पास अब समुद्र में 4 एसएसबीएन हैं। इनमें से दो सेवा में और दो परीक्षण के अधीन हैं। तीसरा एसएसबीएन आईएनएस अरिधमन अपने समुद्री परीक्षण पूरे कर चुका है। वह 2026 के अंत में कमीशन होने को तैयार है। यह रणनीतिक उपलब्धि उस परियोजना की परिणति है, जो 1984 में तीन एसएसबीएन की आपूर्ति के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल (एटीवी) परियोजना की स्थापना के साथ शुरू हुई थी। एस4* को एक दशक से पहले एस4 और बड़ी एस5 एसएसबीएन परियोजना के बीच अंतरिम समाधान के रूप में ऑर्डर किया गया था।
सम्बंधित ख़बरें
Israel Blast: बेइत शेमेश स्थित टोमर टेस्टिंग ग्राउंड में भयंकर विस्फोट, आसमान में छाया काला धुआं
Teesta River: तीस्ता विवाद पर बांग्लादेश ने थामी ड्रैगन की उंगली, भारत के लिए क्यों खड़ी हो सकती है नई मुसीबत?
ट्रंप के जाते ही पुतिन की एंट्री! 19 मई को बीजिंग में सजेगा ‘दो दोस्तों’ का दरबार; आखिर क्या है मुद्दा?
Trump China Visit: ट्रंप चीन दौरा रहा बेहद अहम, शी जिनपिंग संग मुलाकात को बताया ‘G-2’ मोमेंट
1998 में तैयार किया गया था पहला एसएसबीएन
1998 में आईएनएस अरिहंत का सफर शुरू हुआ था। तब इसके ढांचे का काम शुरू हुआ था। यह वही समय था, जब भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षणों से दुनिया को चौंकाया था। 2009 में इसे पानी में उतारा गया और 2016 में यह भारतीय नौसेना का हिस्सा बनी। 2018 में इसने सफलतापूर्वक पहला निवारक गश्ती अभियान पूरा किया। इसका मतलब है कि यह समुद्र में तैनात होकर दुश्मन पर नजर रखने और किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए तैयार थी।
29 अगस्त 2024 को आईएनएस अरिघाट शामिल हुई
दूसरी इकाई आईएनएस अरिघाट 29 अगस्त 2024 को सेवा में शामिल हुई। तीसरी इकाई आईएनएस अरिधमन 2026 की शुरुआत में सेवा में शामिल होगी। एस4* का नाम अब तक घोषित नहीं किया गया है, लेकिन पिछले उदाहरणों से संकेत मिलता है कि नाम के आगे अरी शब्द जोड़ा जाएगा, जिसका संस्कृत में अर्थ शत्रु होता है।
यह भी पढ़ें: राष्ट्रपति मुर्मू ने INS वाघशीर पर की समुद्री यात्रा, कितनी खास है ये पनडुब्बी?
अरिहंत और अरिघात करीब एक समान
देश की पनडुब्बियां अरिहंत और अरिघात मिसाइलों से लैस हैं। ये पनडुब्बियां 110 मीटर से लंबी हैं। 6,000 टन से ज्यादा वजनी हैं। ये 16 K-15 SLBM या 4 K-4 SLBM मिसाइलें ले जा सकती हैं। अरिधमन और S4 पनडुब्बियां थोड़ी बड़ी हैं। इनके डिजाइन में 10 मीटर का अतिरिक्त हिस्सा जुड़ा है। इस हिस्से में चार और K4 मिसाइलें रखी जा सकती हैं।
