आरोपी संजय रॉय का किया जाएगा पॉलीग्राफी टेस्ट, जानें कितना सटीक होता है ये तरीका
आरजी कर अस्पताल की ट्रेनी डॉक्टर मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने जांच एजेंसी को आरोपी संजय रॉय के पॉलीग्राफी टेस्ट करने की मंजूरी दे दी है। जिसके बाद इस केस में बड़ा खुलासा हो सकता है। आज हम बात करेंगे पॉलीग्राफी टेस्ट क्या होता है और ये कैसे काम करता है?
- Written By: शानू शर्मा
संजय रॉय का होगा पॉलीग्राफ टेस्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कोलकाता: आरजी कर कॉलेज की ट्रेनी डॉक्टर मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने जांच एजेंसी को आरोपी संजय रॉय के पॉलीग्राफी टेस्ट की मंजूरी दे दी है। अदालत की ओर से इससे पहले 4 अन्य ट्रेनी डॉक्टर और पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष के लिए भी इस टेस्ट की मंजूरी दी गई। वहीं आरोपी के मनोविश्लेषण से यह पता चला है कि संजय रॉय एक विकृत व्यक्ति था।
केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के एक अधिकारी ने बताया कि संजय रॉय जानवर जैसी प्रवृत्ति का इंसान है। वो गंदी फिल्मे, शराब और नशे का आदी था। घटना को अंजाम देने से पहले भी उसने यही सारी हरकतें की थी। वहीं आरोपी पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष का नजदीकी भी बताया जा रहा है।
संदीप घोष से भी पूछताछ जारी
सीबीआई द्वारा पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष से भी लगातार पूछताछ की जा रही है। मिल रही जानकारी के मुताबिक संजय रॉय अस्पताल में पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष का बाउंसर बनकर घूमता था, हालांकि यह बात अभी तक साबित नहीं हो पाया है। पॉलीग्राफी टेस्ट के बाद बहुत सारी बातों का खुलासा हो सकता है। उन चार डॉक्टरों के बयान को मिलाया जाएगा, जो घटना की रात ट्रेनी डॉक्टर के साथ बैठकर खाना खाए थे।
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पॉलीग्राफी टेस्ट क्या होता है
बता दें कि पॉलीग्राफी टेस्ट एक खास तकनीक पर काम करती है। यह बात सच है कि अगर कोई व्यक्ति झूठ बोलता है तो उसके हाव-भाव बदल जाते हैं। लेकिन उनके हाव-भाव को समझना थोड़ा मुश्किल होता है। किसी व्यक्ति के झूठ बोलने पर दिल की धड़कने तेज हो जाती है। कोई व्यक्ति साफ तरीके से बोल नही पाता, कुछ लोगों के शरीर से पसीना आना शुरू हो जाता है।
पॉलीग्राफी टेस्ट के दौरान इंसान के शरीर से कार्डियो-कफ या सेंसेटिव इलेक्ट्रोड को जोड़ दिया जाता है। जो की इंसान के रक्तचाप,नाड़ी, रक्त प्रवाह तक को भी माप लेता है। अगर पूछताछ के दौरान अगर इसके डेटा में ज्यादा उतार-चढ़ाव आाता है तो यह मान लिया जाता है कि वह व्यक्ति कोई बात झूठ बोल रहा है या फिर किसी बात को झिपाने की कोशिश कर रहा है। जिसके बाद जांच अधिकारी सच्चाई निकलवाने का दूसरा रास्ता ढूंढते हैं।
