जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन और उड़ान 2.0 (सोर्स-सोशल मीडिया)
UDAN 2.0 Scheme Expansion: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में 11,200 करोड़ रुपये की लागत से बने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का भव्य उद्घाटन किया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने देश के विमानन क्षेत्र को नई दिशा देते हुए भारत में किफायती हवाई यात्रा के सपने को साकार करने का संकल्प दोहराया। सरकार की नई UDAN 2.0 योजना का विस्तार के माध्यम से अब दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिक भी बहुत ही कम खर्च में हवाई जहाज की यात्रा कर सकेंगे। यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगा बल्कि आने वाले समय में भारतीय विमानन क्षेत्र के विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा।
प्रधानमंत्री ने रिमोट का बटन दबाकर जेवर स्थित इस विशाल हवाई अड्डे की शुरुआत की जो देश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा। मोदी जी ने स्पष्ट किया कि हवाई पट्टियां केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं हैं बल्कि ये प्रगति की असली उड़ान का प्रतीक हैं। जेवर एयरपोर्ट का खुलना भारतीय विमानन क्षेत्र में एक नए और आधुनिक युग की शुरुआत माना जा रहा है।
आम आदमी की पहुंच में आसमान लाने के लिए सरकार अब ‘उड़ान 2.0’ योजना लेकर आई है जिसके तहत बड़े बदलाव किए जाएंगे। साल 2014 से पहले देश में केवल 74 हवाई अड्डे थे जिनकी संख्या अब बढ़कर 160 से भी अधिक हो गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना ने छोटे शहरों के आसमान को भी उड़ानों से जोड़कर एक क्रांतिकारी भूमिका निभाई है।
सरकार ने उड़ान 2.0 के विस्तार के लिए 28,840 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को अपनी मंजूरी दे दी है। इस राशि का उपयोग अगले 10 वर्षों में यानी वित्तीय वर्ष 2035-36 तक पूरे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए किया जाएगा। पीएम मोदी का लक्ष्य छोटे शहरों में 100 नए हवाई अड्डे और 200 आधुनिक हेलीपैड तैयार करना है।
योजना का सबसे बड़ा लाभ पहाड़ी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर राज्यों और द्वीपीय इलाकों को मिलेगा जहां पहुंचना आज भी एक बड़ी चुनौती है। सड़क या रेल मार्ग की तुलना में हवाई मार्ग इन क्षेत्रों के विकास और पर्यटन के लिए संजीवनी का काम करेगा। कनेक्टिविटी बढ़ने से टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्थानीय व्यापार में भी जबरदस्त उछाल आने की पूरी संभावना है।
‘मेड इन इंडिया’ पहल के तहत क्षेत्रीय उड़ानों के लिए स्वदेशी विमानों की खरीद हेतु 400 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान रखा गया है। इसके अंतर्गत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के ‘ध्रुव’ हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर के लिए ‘डॉर्नियर’ विमानों को शामिल करने का प्रस्ताव है। हवाई अड्डों की संख्या बढ़ने से पायलट और केबिन क्रू समेत लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
एयरलाइंस कंपनियों को छोटे रूट्स पर विमान चलाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु 10,043 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग दी जाएगी। यह आर्थिक सहायता 10 सालों तक उपलब्ध रहेगी ताकि विमान संचालन का खर्च वहन किया जा सके और किराया सस्ता रहे। मेडिकल इमरजेंसी के दौरान दूरदराज के इलाकों से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी यह नेटवर्क काफी मददगार होगा।
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यह पूरी योजना भारत के विमानन इकोसिस्टम को दुनिया में सबसे मजबूत बनाने और 2047 के लक्ष्य की ओर एक कदम है। अब तक 1.62 करोड़ से अधिक लोग सस्ती दरों पर हवाई सफर का लाभ उठा चुके हैं जो एक बड़ी सफलता है। 663 रूट्स पर सुचारू संचालन के साथ भारत अब वैश्विक स्तर पर एक बड़ी विमानन शक्ति बनकर उभर रहा है।