फिर शुरू होगी संसद की कार्यवाही, सरकार ने 3 दिनों का विशेष सत्र बुलाया, साफ होगा महिला आरक्षण का रास्ता!

Parliament Budget Session: संसद बजट सत्र का एक्सटेंशन कर दिया गया है। 16 से 18 अप्रैल को बैठक होंगी। महिला आरक्षण बिल पर सरकार की तैयारी तेज है, वहीं जयराम रमेश ने सवाल खड़े किए हैं।
Parliament Budget Session, Women Reservation Bill Going To Be Passed
संसद (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Women Reservation Bill: संसद के बजट सत्र के विस्तार को लेकर अब स्थिति साफ हो गई है। राज्यसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने पहले ही संकेत दिया था कि संसद की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं किया जाएगा और तय उद्देश्य के साथ कुछ समय बाद फिर बैठक बुलाई जाएगी। अब संसद के अगले सत्र की तारीख भी घोषित कर दी गई है। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं किया जाएगा।

दोनों सदनों की बैठक 16 अप्रैल से दोबारा शुरू होगी, जबकि 17 और 18 अप्रैल को भी कार्यवाही जारी रहेगी। इन तीन दिनों के दौरान सरकार महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने की तैयारी में है। इसे बजट सत्र के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

किरेन रिजिजू ने क्या कहा?

किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में कहा कि हमारे पास कुछ विधेयक हैं, जिन्हें हमने विपक्षी दलों के सदस्यों के साथ साझा किया है। अगले 2-3 हफ्तों में एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया जाएगा। इसलिए सरकार सदन को स्थगित करने का प्रस्ताव रखती है। हम बहुत जल्द निश्चित अवधि के लिए मिलेंगे।

जयराम रमेश ने सरकार पर साधा निशाना

दरअसल, महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार ने पहले ही संकेत दे दिए थे। जिसके चलते उन्होंने 2029 के आम चुनाव में इसे लागू करने की मंशा जताई थी। वहीं विपक्षी दलों ने पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनाव के बाद इस विषय को लेकर बैठक बुलाने और इसके बाद संसद की बैठक बुलाकर इसे लागू करने की मांग की थी। कांग्रेस के चीफ व्हिप जयराम रमेश ने चुनाव के दौरान इस कदम को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया।

चुनाव के बीच इस बिल की याद आ रही- जयराम रमेश

जयराम रमेश ने अपील की कि यह बिल चुनाव के बाद लाया जाए। जयराम रमेश ने कहा कि जब यह विधेयक संसद से पारित हुआ था, तब विपक्ष ने इसे तुरंत लागू करने की मांग की थी लेकिन सरकार ने जनगणना और परिसीमन जैसी बाधाओं का हवाला देते हुए इसे लागू करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच सरकार को इस बिल की याद आ रही है।

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