'हम दुश्मन की लाशें देख खुश नहीं होते', NSA अजित डोभाल का जोशीला बयान, कहा- आप पावरफुल तो कोई विरोध नहीं

NSA Ajit Doval: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने युवाओं के साथ कुछ अहम बातें शेयर कीं, और कहा कि अगर इन सिद्धांतों का पालन किया जाए, तो भारत को सुपरपावर बनने से कोई नहीं रोक सकता।
NSA Ajit Doval speech in Viksit Bharat Young Leaders Dialogue
NSA अजित डोभाल (फोटो- सोशल मीडिया)
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NSA Ajit Doval News: भारत के 'जेम्स बॉन्ड' कहे जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने युवाओं को कामयाबी का ऐसा मंत्र दिया है, जिसकी चर्चा हर जगह हो रही है। नई दिल्ली में आयोजित 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' में उन्होंने साफ कहा कि अगर आप ताकतवर हैं, तो दुनिया में कोई आपका विरोध करने की हिम्मत नहीं करेगा। डोभाल ने युवाओं को नेतृत्व के ऐसे गुर सिखाए जो भारत को महाशक्ति बनाने का रास्ता दिखाते हैं।

शुक्रवार को भारत मंडपम में युवाओं से रूबरू होते हुए एनएसए ने नेपोलियन की एक मशहूर बात याद दिलाई। उन्होंने कहा कि अगर भेड़ों की फौज का नेता शेर हो तो उससे डरना चाहिए, लेकिन अगर शेरों की फौज का नेता भेड़ हो तो डरने की कोई बात नहीं है। उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास की जो रफ्तार तय की है, अब देश 'ऑटोपायलट मोड' में भी विकसित बनने की दिशा में बढ़ता रहेगा।

शेर जैसी लीडरशिप और कड़े फैसले

अजित डोभाल ने युवाओं को समझाया कि लीडरशिप सिर्फ पद नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सही वक्त पर सही और कड़े फैसले लेना ही एक असली नेता की सबसे बड़ी ताकत होती है। चाहे वह विज्ञान हो, तकनीक हो या सुरक्षा का क्षेत्र, युवाओं को अभी से फैसले लेने की आदत और क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के युवा और उनके समय में भले ही अंतर हो, लेकिन निर्णय लेने की क्षमता दोनों में समान होनी चाहिए। यही क्षमता आगे चलकर देश की बागडोर संभालने में काम आएगी क्योंकि भारत का विकसित होना अब तय है, बस सवाल यह है कि उसका नेतृत्व कौन करेगा।

इच्छाशक्ति ही असली ताकत

NSA ने युद्ध और हिंसा को लेकर एक बहुत गहरी और मानवीय बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम कोई मानसिक रोगी नहीं हैं जो दुश्मन की लाशें या कटे हुए अंग देखकर खुश हों या संतोष महसूस करें। युद्ध इसलिए नहीं लड़े जाते कि हमें हिंसा पसंद है, बल्कि यह दुश्मन का मनोबल तोड़ने के लिए होते हैं। इसका मकसद होता है कि दुश्मन हमारी शर्तें मानने और आत्मसमर्पण करने को मजबूर हो जाए। डोभाल ने राष्ट्रीय इच्छाशक्ति को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। उनके मुताबिक, अगर किसी देश के पास संसाधन और हथियार हैं लेकिन मनोबल नहीं है, तो वे सब बेकार साबित होते हैं। असली जीत हथियारों से नहीं, बल्कि अटूट इच्छाशक्ति से मिलती है।

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