

Indian Railway News: भारतीय रेलवे ने यात्री सुविधाओं को नया आयाम देते हुए स्लीपर कोच में भी बेडरोल सेवा शुरू किया है। इससे पहले यह सुविधा एसी कोच थर्ड एसी, सेकेंड एसी और फर्स्ट क्लास के यात्रियों को हीमिलती रही थी। अब नॉन एसी कोच के यात्री भी बेडशीट, तकिया और पिलो कवर जैसी सुविधाएं पाएंगे।
यह सेवा पूरी तरह ऑन डिमांड और ऑन पेमेंट होगी। यात्री चाहे तो तय राशि देकर बेडरोल ले सकते हैं। रेलवे का दावा है कि बेडरोल पूरी तरह से स्वच्छ, सैनिटाइज्ड और रेडी-टू-यूज होगा।
दक्षिण रेलवे के चेन्नई डिविजन ने यात्रियों के आराम और सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह पहल की है। इसकी आधिकारिक शुरुआत 1 जनवरी से चेन्नई डिविजन की चुनिंदा ट्रेनों में होगी। इसकी घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर यात्रियों ने इसे सकारात्मक कदम माना और इस नई पहल का स्वागत किया है। दरअसल, स्लीपर कोच के यात्रियों को यात्रा के दौरान अपनी चादर, कंबल या तकिया ले जाना पड़ता था। इससे उनका सामान भारी हो जाता था। ठंड में यह चुनौती और बढ़ जाती थी। रेलवे के नए फैसले से यात्रियों को अतिरिक्त सामान ढोने से राहत मिलेगी।
रेलवे ने बेडरोल के लिए शुल्क तय किया है। इसमें बेडशीट के लिए 20 रुपये, तकिये और कवर के लिए अलग शुल्क है। यह सेवा यात्रियों को कम लागत में साफ-सुथरी और आरामदायक यात्रा का विकल्प देगी। चेन्नई डिविजन ने इस सुविधा को वर्ष 2023-24 में न्यू इनोवेटिव नॉन फेयर रेवेन्यू आइडियाज स्कीम के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया था। इस दौरान यात्रियों ने इसके प्रति काफी उत्साह दिखाया। बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया रहने के बाद दक्षिण रेलवे ने इसे स्थायी सेवा के रूप में लागू करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का मानना है कि यह नॉन फेयर रेवेन्यू बढ़ाने के साथ यात्रियों को बेहतर सुविधा भी देगा। यह भी बढ़ें: 1 दिसंबर 2025 से बदल गए नियम: रेलवे तत्काल टिकट, SBI ATM चार्ज, एमकैश बंद और कॉलर नेम सिस्टम लागू
अधिकारियों की मानें तो चेन्नई मॉडल सफल रहा तो इसको पूरे देश में लागू किया जाएगा। मतलब भविष्य में प्रयागराज, झांसी, आगरा, कानपुर, लखनऊ समेत सभी मंडलों के यात्रियों को स्लीपर कोच में बेडरोल सुविधा मिलेगी। यह सुविधा 20, 30 और 50 रुपये की रेंज में होगी। उत्तर-मध्य रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि रेलवे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रयासरत है। दक्षिण रेलवे के अनुभव और परिणामों के आधार पर इसे अन्य क्षेत्रों में लागू करने की रणनीति तैयार की जाएगी।