गाड़ियों के लिए बड़ी खबर! 20% से ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर सरकार का बड़ा फैसला! संसद में बताई सच्चाई
Ethanol Blending Programme: पेट्रोल में 20% से अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग पर अभी फैसला नहीं हुआ है। सरकार ने स्पष्ट किया कि E20 पूरी तरह सुरक्षित है और E85 केवल फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
हाई-एथेनॉल पेट्रोल (सोर्स-सोशल मीडिया)
Central Government on Ethanol Blending: केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद को बताया कि फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर विचार किया जाता है, तो उससे पहले विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे तथा ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और रिसर्च संस्थानों सहित सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा की जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ई85 फ्यूल (85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल) केवल फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल्स (एफएफवी) के लिए शुरू किया गया है, जिन्हें विशेष रूप से इस फ्यूल के लिए डिजाइन और सर्टिफाई किया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा कि इसका मतलब देश भर में पेट्रोल की सामान्य एथेनॉल ब्लेंडिंग को 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाना नहीं है।
एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम कैसे लागू किया गया?
मंत्री ने बताया कि एथेनॉल का उपयोग दुनिया के कई देशों में पिछले सौ वर्षों से किया जा रहा है और ब्राजील जैसे देशों में लंबे समय से अधिक एथेनॉल ब्लेंड फ्यूल का इस्तेमाल हो रहा है। भारत में एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) प्रोग्राम को चरणबद्ध, वैज्ञानिक और व्यापक परामर्श प्रक्रिया के तहत लागू किया गया है, जिसमें नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी), ऑटोमोबाइल कंपनियों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की भागीदारी रही है।
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E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा खुलासा, 23 करोड़ वाहनों में इस्तेमाल के बाद भी इंजन खराब होने का नहीं मिला सबूत
सरकार के अनुसार, वैज्ञानिक अध्ययन, फील्ड वैलिडेशन और वास्तविक उपयोग के अनुभवों से यह साबित हुआ है कि निर्धारित मानकों और वाहन निर्माता की सिफारिशों के अनुसार इस्तेमाल किए जाने पर ई20 पेट्रोल सुरक्षित, स्वच्छ और तकनीकी रूप से बेहतर फ्यूल है। सरकार का कहना है कि यह निष्कर्ष केवल लैब रिसर्च पर नहीं, बल्कि देश भर में इसके व्यापक उपयोग के अनुभव पर आधारित है।
ढाई साल से हो रहा E20 का यूज
सुरेश गोपी ने बताया कि ई15+ ब्लेंडेड पेट्रोल का देश में साढ़े तीन साल से अधिक समय से और ई19-ई20 फ्यूल का ढाई साल से अधिक समय से उपयोग हो रहा है। इस दौरान 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन फ्यूल्स पर चल चुकी हैं, लेकिन एथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहन में खराबी आने का कोई सत्यापित मामला सामने नहीं आया है। वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड में भी ई20 के कारण असामान्य जंग, घिसावट या वाहन की उम्र कम होने के प्रमाण नहीं मिले हैं और कंपनियां ई20 इस्तेमाल करने वाले वाहनों पर सामान्य रूप से वारंटी भी दे रही हैं।
सरकार ने बताया कि देश की एक प्रमुख पैसेंजर व्हीकल कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे पुराने वाहन भी शामिल थे जो ई20 सर्टिफाइड नहीं थे। इसके बावजूद ई20 की वजह से इंजन डैमेज या किसी असामान्य घिसावट का कोई मामला सामने नहीं आया। इसी तरह एक प्रमुख टू-व्हीलर कंपनी ने भी अपने सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर बताया कि ई20 इस्तेमाल करने वाले वाहनों में पुराने फ्यूल की तुलना में नुकसान की दर अधिक नहीं पाई गई।
व्यापक लैब टेस्ट के बाद शुरुआत
मंत्री ने कहा कि नीति आयोग, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल), एआरएआई, आईआईपी और एसआईएएम की ओर से किए गए व्यापक लैब टेस्ट और फील्ड वैलिडेशन से भी यह पुष्टि हुई है कि ई20 फ्यूल इंजन में असामान्य घिसावट या तकनीकी अनुकूलता से जुड़ी कोई समस्या पैदा नहीं करता।
माइलेज के सवाल पर सरकार ने कहा कि फ्यूल एफिशिएंसी कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें ड्राइविंग कंडीशन, ड्राइविंग स्टाइल और वाहन का मेंटेनेंस शामिल है। कुछ पुराने ई10-आधारित वाहनों में माइलेज लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है, लेकिन ई20 में हाई ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता, साफ दहन और स्मूद इंजन परफॉर्मेंस जैसे कई फायदे मिलते हैं। एसआईएएम और एआरएआई के अनुसार ई20 से वाहन की एक्सेलरेशन और राइड क्वालिटी बेहतर होती है, साथ ही कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है।
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सरकार ने बताया कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम से देश को बड़ा आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ मिला है। इस योजना के जरिए अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपए से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, करीब 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात कम हुआ है, लगभग 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया गया है।
-एजेंसी इनपुट के साथ
