SIR में कटा BJP के दिग्गज नेता निशिकांत दुबे के माता-पिता का नाम, तो बोले- जानकर बहुत खुशी हुई
Lok Sabha में चुनाव सुधारों पर चल रही गरमा-गरम बहस के बीच एक अजीब वाकया देखने को मिला जब BJP के दिग्गज नेता और सांसद Nishikant Dubey ने भरी संसद में अपनी ही एक व्यक्तिगत घटना साझा की।
- Written By: सौरभ शर्मा
वोटर लिस्ट से कटा मां-बाप का नाम तो संसद में क्यों खुश हुए निशिकांत दुबे? (फोटो- सांसद टीवी)
लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चल रही गरमा-गरम बहस के बीच एक अजीब वाकया देखने को मिला जब बीजेपी के दिग्गज नेता और सांसद निशिकांत दुबे ने भरी संसद में अपनी ही एक व्यक्तिगत घटना साझा की। उन्होंने बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से उनके माता-पिता का नाम काट दिया गया। आमतौर पर कोई भी नेता ऐसी बात पर नाराज होता, लेकिन निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्हें यह जानकर बेहद खुशी हुई। आखिर सांसद महोदय अपने ही माता-पिता का नाम कटने पर खुश क्यों थे और इसका चुनाव सुधारों से क्या गहरा कनेक्शन है, आइये जानते हैं इस दिलचस्प वाकये के बारे में।
लिस्ट से नाम कटने की असली वजह
गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने सदन को बताया कि उनके माता-पिता अब दिल्ली में रहते हैं, इसलिए वे किसी भी कीमत पर बिहार में वोट देने के अधिकारी नहीं थे। उन्होंने इस कार्रवाई को सही ठहराते हुए SIR प्रक्रिया की तारीफ की। इसके बाद उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए याद दिलाया कि जिस EVM पर आज सवाल उठाए जा रहे हैं, उसे कांग्रेस ही लेकर आई थी। दुबे ने कहा कि 1987 में राजीव गांधी इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लाए और 1991 में नरसिम्हा राव की सरकार ने इसे लागू किया। उन्होंने जगन्नाथ राव और एचआर गोखले की रिपोर्टों का हवाला देकर SIR की आवश्यकता पर जोर दिया।
इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करना कोई कांग्रेस से सीखे
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “अगर कोई इतिहास के पन्नों को तोड़-मरोड़कर पेश करना चाहता है, तो उसे कांग्रेस से सीखना चाहिए। आज कांग्रेस के एक स्पीकर ने एक बड़े भाषण में कहा कि राजीव गांधी ने 1988 में इस देश में चुनाव सुधारों के लिए सबसे बड़ा संशोधन किया था। कौन सा संशोधन? उन्होंने उम्र 21 से घटाकर 18 कर दी थी। 1972 की जॉइंट कमेटी की रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी कि उम्र 21 की जगह 18 होनी चाहिए। आप इसे 16 साल बाद लागू कर पाए।”
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निशिकांत दुबे ने ये आंकड़े दिए
निशिकांत दुबे ने पार्लियामेंट में कुछ आंकड़ों का भी हवाला दिया। उन्होंने बिहार की वाल्मीकि नगर सीट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां 2311 वोट काटे गए, और कांग्रेस 1675 वोटों से जीती। चनपटिया सीट पर SIR से 1033 वोट काटे गए, और कांग्रेस 602 वोटों से जीती। ढाका सीट पर 457 नाम हटाए गए और RJD 178 वोटों से जीती। फोर्ब्सगंज सीट पर 1400 नाम हटाए गए और कांग्रेस 221 वोटों से जीती। बलरामपुर सीट पर 1468 नाम हटाए गए और LJP (R) 389 वोटों से जीती। रामगढ़ सीट पर 1197 नाम हटाए गए और बहुजन समाज पार्टी 30 वोटों से जीती। जहानाबाद में 1832 नाम हटाए गए और RJD 793 वोटों से जीती। इन आंकड़ों को गिनने के बाद उन्होंने कहा, “हम हारने वाले हैं। लेकिन हम वोट की पॉलिटिक्स नहीं करते, हम नेशनल पॉलिटिक्स करते हैं।”
