NIA को मिली डॉक्टर डेथ की ‘बारूदी’ आटा चक्की, दिल्ली ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा! एक शख्स हिरासत में
Delhi Blast Case Update: ये टैक्सी ड्राइवर मूल रूप से पलवल के असावटी का निवासी है। जानकारी के अनुसार, आटा चक्की और इलेक्ट्रिकल मशीन को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
NIA को मिली डॉक्टर डेथ की 'बारूदी' आटा चक्की, दिल्ली ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा! एक शख्स हिरासत में
Muzammil Aata Chakki: एनआईए की टीम ने बुधवार की देर रात फरीदाबाद के गांव धोज में एक टैक्सी ड्राइवर के घर से आटा चक्की और कुछ इलेक्ट्रिकल मशीन बरामद की। आटा चक्की का इस्तेमाल डॉक्टर मुजम्मिल धोज में किराए पर लिए अपने कमरे में करता था, जहां से 9 नवंबर को जम्मू कश्मीर और फरीदाबाद की पुलिस ने 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की थी।
क्या काम करता था आटा चक्की में?
खबरों के मुताबिक, मुजम्मिल उस कमरे में यूरिया को आटा चक्की में पीसकर पहले बारीक करता था, फिर इलेक्ट्रिकल मशीन से उसे रिफाइन कर इकट्ठा करता था, और इससे केमिकल तैयार करता था। एनआईए की टीम टैक्सी ड्राइवर को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। खबरों के अनुसार, एनआईए को पूछताछ में डॉक्टर मुजम्मिल ने बताया कि वह काफी समय से यूरिया से अमोनियम नाइट्रेट को रिफाइन करने के लिए आटा पीसने वाली चक्की का इस्तेमाल करता था। उसकी निशानदेही पर ही बुधवार रात टैक्सी ड्राइवर के घर पर छापेमारी की गई।
टैक्सी ड्राइवर को कैसे फंसाया गया?
टैक्सी ड्राइवर मूल रूप से पलवल के असावटी का निवासी है। जानकारी के अनुसार, आटा चक्की और इलेक्ट्रिकल मशीन को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है, जहां से अमोनियम नाइट्रेट के अंश को सैंपल के लिए अलग किया जाएगा। टैक्सी ड्राइवर 20 साल से धोज गांव स्थित अपनी बहन के यहां रहता है और सैनिक कॉलोनी स्थित छोटे बच्चों के स्कूल के लिए कैब चलाता है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टैक्सी ड्राइवर ने एनआईए को पूछताछ में बताया कि करीब 4 साल पहले उसके छोटे बेटे पर गर्म दूध गिर गया था, जिससे वह झुलस गया और गंभीर हालत में अल-फलाह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां डॉक्टर ने उसके बेटे का इलाज किया और तभी से वह डॉक्टर मुजम्मिल के संपर्क में आया। इसके बाद दोनों में मुलाकातें होने लगीं।
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डॉक्टरों का व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल
जांच से पता चला कि इस मॉड्यूल में हर सदस्य की अलग भूमिका थी। मुजम्मिल नए लोगों को भर्ती करता था। डॉ. शाहीन आर्थिक मदद देती और ब्रेनवॉश करती थी। डॉ. उमर नबी (जो ब्लास्ट में मारा गया) योजनाएं बनाता था। मुजम्मिल मरीजों के घर जाकर “मदद” के नाम पर उन्हें अपने जाल में फंसाता था। यही तरीका अपनाकर उसने धौज के कई लोगों को मॉड्यूल से जोड़ा, सिम कार्ड खरीदे और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने दिलाए।
