NCERT विवाद: ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ लिखने वाले 3 विशेषज्ञों ने खटखटाया SC का दरवाजा, जानें क्या दी दलील
NCERT Controversy: एनसीईआरटी की बुक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' को शामिल करने पर मचे हंगामे के बाद ब्लैकलिस्ट हुए तीन विशेषज्ञों ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
फोटो- AI
Supreme Court on NCERT Controversy: एनसीईआरटी की कक्षा 8वीं के लिए जारी की गई सोशल साइंस की नई किताब ‘समाज की खोज: भारत और उससे आगे’ (भाग-II) इस समय कानूनी विवादों के घेरे में है। विवाद की जड़ इस किताब का चौथा चैप्टर ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ है, जिसमें न्यायपालिका से जुड़े उदाहरण देते समय ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ जैसे संवेदनशील मुद्दे का जिक्र किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस कंटेंट को ‘आपत्तिजनक’ करार देते हुए इसके प्रकाशन और प्रसार पर रोक लगा दी और टिप्पणी की कि इससे न्यायपालिका की छवि खराब होती है। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए 11 मार्च को निर्देश दिया था कि इस चैप्टर को तैयार करने वाले तीनों विशेषज्ञों को किसी भी शैक्षणिक जिम्मेदारी से जुड़े काम से अलग कर दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तीन विशेषज्ञ
अब इस मामले में नया मोड़ तब आया जब ब्लैकलिस्ट किए गए तीनों शिक्षाविद- प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इन विशेषज्ञों का मुख्य तर्क यह है कि यह चैप्टर किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं लिखा गया था, बल्कि यह एक सामूहिक प्रक्रिया का हिस्सा था।
सम्बंधित ख़बरें
सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा शर्मा मामले पर लिया स्वत: संज्ञान, CJI की अध्यक्षता वाली बेंच 25 मई को करेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: नागपुर के उद्योगों को बड़ी राहत, MIDC लीज ट्रांसफर पर GST नहीं
SBI के करोड़ों ग्राहकों के लिए बड़ी चेतावनी! अगले 6 दिनों तक बंद रहेंगे बैंक, जान लें क्या है अल्टरनेटिव
NCERT की किताबों से अब गायब होंगे कार्टून? सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद छिड़ा बड़ा संग्राम
उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाए क्योंकि वे अपने-अपने क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं और उन पर लगे आरोपों से उनकी साख प्रभावित हुई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच के सामने उनके वकीलों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि नई शिक्षा नीति के तहत संदर्भों को स्पष्ट करना था।
कौन हैं विवादों में घिरे ये तीन प्रमुख शिक्षाविद?
इस विवाद में शामिल तीनों विशेषज्ञों का शैक्षणिक और सार्वजनिक जीवन में लंबा अनुभव रहा है:
- प्रोफेसर मिशेल डैनिनो: पद्मश्री से सम्मानित (2017), ये भारतीय ज्ञान परंपरा के विशेषज्ञ हैं और IIT गांधीनगर में विजिटिंग प्रोफेसर रह चुके हैं।
- सुपर्णा दिवाकर: शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में 30 वर्षों का अनुभव रखने वाली सुपर्णा, ‘इंडियन स्कूल ऑफ डेवलपमेंट मैनेजमेंट’ की संस्थापक सदस्य हैं।
- आलोक प्रसन्न कुमार: एक जाने-माने कानूनी विशेषज्ञ और ‘विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी’ के सह-संस्थापक हैं, जिन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा ली है।
समीक्षा के लिए गठित हुई हाई पावर कमेटी
कोर्ट की सख्ती के बाद केंद्र सरकार और एनसीईआरटी ने अनुपालन हलफनामा दाखिल कर दिया है और भविष्य के लिए नई कमेटियां गठित की हैं। इस विवादित चैप्टर और उच्चतर कक्षाओं के विधि अध्ययन पाठ्यक्रमों की समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा, वरिष्ठ वकील के.के. वेणुगोपाल और कुलपति प्रकाश सिंह शामिल हैं।
यह भी पढ़ें: बंगाल में 91 लाख लोगों की पहचान पर संकट, वोटर लिस्ट से नाम गायब, बंगाल में लोकतंत्र की सबसे बड़ी ‘छंटनी’
यह समिति राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के साथ मिलकर काम करेगी। इसके अलावा, शिक्षा मंत्रालय ने एक 20 सदस्यीय हाई पावर कमेटी का भी गठन किया है जो समग्र रूप से पाठ्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर विचार करेगी।
