पाताल में समा जाएगा नैनीताल? धरती के नीचे बिछा ‘मौत का जाल’, लौट रही है 1880 जैसी तबाही!
नैनीताल की ज़मीन के नीचे चूहों का ऐसा जाल बन गया है, जो शहर को किसी भी वक्त तबाह कर सकता है. चूहों ने सुरंगें खोद-खोदकर नींव को खोखला कर दिया है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
नैनीताल
नैनीताल: उत्तराखंड का खूबसूरत हिल स्टेशन नैनीताल वैसे तो घूमने के लिए फेसम है, लेकिन आजकल किसी और वजह से चर्चा में है। ये शहर अब एक अदृश्य लेकिन खतरनाक संकट की चपेट में आ गया है। शहर के नीचे चूहों द्वारा बनाई गई सुरंगों से यहां की जमीन खोखला हो रही है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि अगर हल्का सा भूकंप भी आया तो पूरा शहर तबाह हो सकता है।
शहर के कई हिस्सों में तो चूहों ने ऐसी सुरंगें बना दी हैं कि जमीन धंसनी शुरू हो गई है। वहां सड़कें दरक रही हैं तथा पहाड़ी इलाकों में बने घरों की नींव हिलने लगी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शेर का डांडा, लडियाकांटा, सात नंबर आयारपाटा तथा मुख्य बाजार के इलाकों में यह खतरा सबसे ज्यादा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनको अब डर सताने लगा है कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
नैनीताल में पहले भी मच चुकी है तबाही
नैनीताल पहले से ही संवेदनशील है। साल 1880 में भूकंप के झटके से यहां पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा ढह गया था, जिसमें 151 लोगों की मौत हुई थी। इसके बावजूद उस पहाड़ी पर लगातार निर्माण कार्य होता रहा और अब हालात फिर से चिंताजनक हो गए हैं।
चूहे बने मुसीबत
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शहर में जगह-जगह पर फेंके जा रहे खाने-पीने के सामानों से चूहों की तादाद बढ़ गई है। यह चूहे अब पूरे शहर के नीचे सुरंगें बनाकर उसकी नींव को खोखला कर रहे हैं। यह मामला केवल जमीन धंसाव तक सीमित नहीं है, बल्कि चूहों के माध्यम से प्लेग जैसी बीमारियों का खतरा भी अब मंडराने लगा है।
प्रशासन के पास नहीं है प्लान
इतना गंभीर मामला सामने आने के बाद भी प्रशासन के पास इन चूहों से निपटने का कोई ठोस प्लान नहीं है। न तो कोई रोकथाम की पहल दिखाई दे रही है और न ही शहर के लोगों को राहत देने के लिए कोई तैयारी।
