

Bhandara Chalo Sansad March: सोमवार को नई दिल्ली में नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक तथा अनियमितताओं के विरोध में निकाले गए 'चलो संसद' मार्च के दौरान छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद जिले में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया है।
भंडारा कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकुंद साखरकर ने घटना की कड़ी निदा करते हुए कहा कि सरकार विपक्ष और छात्रों की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक और सांसदों को रोका जा रहा है। और दूसरी ओर अपने भविष्य की मांग कर रहे छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। उनके अनुसार शांतिपूर्ण युवाओं को बैरिकेडिंग लगाकर रोकना और फिर आसू गैस व लाठीचार्ज करना प्रशासनिक विफलता को छिपाने का प्रयास है। उन्होंने सवाल उठाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले युवाओं के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार क्यों किया गया।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन की भंडारा जिला काउन्सील सदस्य कॉमरेड तेजस्विनी महाकालकर ने कहा की छात्रों के प्रदर्शन का उद्देश्य नीट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने जानबूझकर छात्रों के सिर को निशाना बनाकर लाठीचार्ज किया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे। न्याय की मांग कर रहे छात्रों पर लाठियां और आंसू गैस का इस्तेमाल लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है और इससे यह संदेश जाता है कि सरकार छात्रों की आवाज से घबराई हुई है।
यूथ फॉर सोशल जस्टिस के प्रमोद केसलकर ने कहा की लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से विद्यार्थियों का संवैधानिक अधिकार है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और उन्हें अपराधी की तरह पेश करना अत्यंत चिंताजनक है।
इससे लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, इतिहास गवाह है कि विद्यार्थियों के आंदोलनों ने समाज और देश में कई सकारात्मक परिवर्तन किए हैं। सरकार को दमन के बजाय संवाद, संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मार्ग अपनाना चाहिए। छात्रों की आवाज को बलपूर्वक दबाने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि असंतोष और अविश्वास बढ़ेगा।