Monsoon 2025: 16 साल बाद समय से पहले मानसून देगा दस्तक, इस तारीख को केरल में होगी एंट्री
आईएमडी ने उम्मीद जताई है कि इस साल मानसून देश में समय से पहले दस्तक से सकता है। केरल में इस साल मानसून 1 जून की जगह 27 मई को एंट्री करेगा। इससे भारत में 4 महीने अच्छी बारिश हो सकती है।
- Written By: अक्षय साहू
समय से पहले मानसून देगा दस्तक (प्रतिकात्मक तस्वीर- फोटो- सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: भारत में इस साल मानसून समय से पहले दस्तक देने वाला है। रविवार को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस बात की जानकारी दी कि इस बार मानसून 27 मई से शुरू हो सकता है, जो आमतौर पर एक जून से आरंभ होता था। आईएमडी ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के 27 मई को केरल पहुंचने की संभावना है, जो आमतौर पर मानसून केरल में एक जून को दस्तक देता है।
आईएमडी के आंकड़े के मुताबिक, अगर मानसून केरल में उम्मीद के अनुरूप पहुंचता है, तो यह 2009 के बाद से भारतीय मुख्य भूमि पर मानसून का समय से पहले आगमन होगा। तब मानसून ने 23 मई को दस्तक दी थी। भारत में मुख्य रूप से मानसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा तब की जाती है जब यह केरल पहुंचता है, आमतौर पर एक जून के आसपास होता है। लेकिन इस बार इसके 5 दिन पहले पहुंचने की उम्मीद है।
अच्छी बारिश होने की उम्मीद
भारत के दक्षिण पश्चिम मानसून एक जून को केरल पहुंचकर जुलाई के पहले हफ्ते तक पूरे भारत को कवर कर लेता है। इसके बाद सितंबर से मानसून भारत के उत्तर पश्चिमी इलाकों से विदाई लेना शुरू कर देता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से विदा हो जाता है। भारत में इस साल चार महीने के मानसून के मौसम में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की उम्मीद है।
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मानसून पिछले साल 30 मई को दक्षिणी राज्य में आया था, 2023 में 8 जून को, 2022 में 29 मई को, 2021 में 3 जून को, 2020 में 1 जून को, 2019 में 8 जून को और 2018 में 29 मई को केरल आया था। आईएमडी के एक अधिकारी ने कहा कि मानसून के आगमन की तिथि और पूरे देश में इस मौसम में होने वाली कुल वर्षा के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।
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केरल में मानसून के जल्दी या देर से पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि यह देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह पहुंचेगा। यह बड़े पैमाने पर परिवर्तनशीलता और वैश्विक, क्षेत्रीय और स्थानीय स्थितियों पर निर्भर होता है। आईएमडी ने अप्रैल में 2025 के मानसून में सामान्य से अधिक कुल वर्षा का पूर्वानुमान जताया था और अल नीनो परिस्थितियों की संभावना को खारिज कर दिया था, जो भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम वर्षा से जुड़ी है।
