

DMK Organizational Restructuring: विधानसभा सत्र के बाद डीएमके संगठन में एक बड़ा फेरबदल कर सकती है। एमके स्टालिन चुनावी रणनीति मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर फोकस कर रहे हैं। हाल ही में हुए चुनावों में अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद पार्टी नेतृत्व संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
पार्टी के सूत्रों ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि पुनर्गठन मुख्य रूप से चेन्नई और उसके आस-पास के जिलों पर केंद्रित होगा। उन्होने यह भी बताया कि डीएमके को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इस नियम का मकसद पार्टी की इकाइयों के बीच तालमेल को सही करना है। इसके साथ ही मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाना है और संगठन को आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के लिए तैयार करना है। इस कदम का मकसद कामकाज को सुव्यवस्थित करना और जमीनी स्तर पर पार्टी की गतिविधियों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चेन्नई का मौजूदा संगठनात्मक ढांचा राज्य के कई अन्य जिलों से अलग है। जहां चेन्नई के बाहर कई जिलों में संगठन दो विधानसभा क्षेत्रों वाली इकाइयों के आधार पर बने हैं, वहीं राजधानी शहर में कई अपेक्षाकृत छोटे संगठनात्मक जिले हैं। प्रस्तावित पुनर्गठन के तहत चेन्नई में वरिष्ठ नेताओं को चार विधानसभा क्षेत्रों वाले क्लस्टर की जिम्मेदारी दी जा सकती है। विधानसभा सत्र के बाद डीएमके संगठन में बड़ा फेरबदल कर सकती है। एमके स्टालिन चुनावी रणनीति मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर फोकस कर रहे हैं।
आपको बता दें, कि डीएमके यह सबसे अधिक चिंताजनक इलाकों में से एक बनकर उभरा है। इनमे कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में स्टालिन की हार शामिल है। समीक्षा समितियों की सिफारिशों के आधार पर उम्मीद है, कि डीएमके नेतृत्व विधानसभा सत्र खत्म होने के तुरंत बाद पार्टी संगठन को फिर से मजबूत करने और भविष्य के चुनावों के लिए उसे तैयार करने के मकसद से पुनर्गठन लागू करेगा।
फिलहाल चेन्नई में कई जिला सचिव और वरिष्ठ नेता एक साथ पांच से छह विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब पार्टी नेतृत्व ऐसी नई व्यवस्था बनाने पर विचार कर रहा है, जिसमें हर पदाधिकारी की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय हो। इससे संगठन को बेहतर तरीके से चलाने और जमीनी स्तर पर कामकाज को मजबूत करने में मदद मिलेगी। यह पुनर्गठन प्रस्ताव विधानसभा चुनाव के बाद डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के दौरान इसकी शुरूआत की गई थी। खबरों के अनुसार विधानसभा क्षेत्र-स्तर की चुनौतियों और मतदाताओं की बदलती सोच का विश्लेषण किया गया। आपको बता दें, कि डीएमके यह सबसे अधिक चिंताजनक इलाकों में से एक बनकर उभरा है। इनमे कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में स्टालिन की हार शामिल है। पार्टी का लक्ष्य आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपने चुनावी तंत्र को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाना है।