Jaishankar: आतंक का खेल पाकिस्तान को पड़ा भारी, खुद के फैलाए जाल में बुरी तरह से फंसा; जयशंकर बोले- दोहरी मानसिकता ले डूबी
jaishankar: एस. जयशंकर ने पाकिस्तान की दोहरी नीति पर बोला हमला बोलते हुए कहा कि आतंकवाद अब उसी पर भारी पड़ रहा है। भारत अब किसी छल-प्रपंच के आगे नहीं झुकेगा।
- Written By: सौरभ शर्मा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर (फोटो सोर्स - सोशल मीडिया)
गांधीनगर: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद और पाकिस्तान के दोहरे रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब किसी भी तरह के छल-प्रपंच के सामने झुकने वाला नहीं है। गुजरात में एक संवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पाकिस्तान की नीतियों को बेनकाब करते हुए कहा कि वह तालिबान और अन्य पक्षों के साथ दोहरी चालें चला करता था, लेकिन जैसे ही अमेरिका ने अफगानिस्तान छोड़ा, पाकिस्तान का यह खेल खुद उसी पर भारी पड़ गया। पाकिस्तान ने जिन आतंकवादियों को बढ़ावा दिया, वही अब उसे नुकसान पहुंचा रहे हैं।
जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान की नीति हमेशा से दोहरेपन से भरी रही है। एक ओर वह तालिबान को समर्थन दे रहा था, तो दूसरी ओर खुद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ खड़ा दिखाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन जैसे ही अमेरिकी सेना अफगानिस्तान से हटी, पाकिस्तान का यह मुखौटा उतर गया। उन्होंने कहा कि यह देश अपने ही बनाए जाल में फंस गया है और अब आतंकवाद उसी के लिए एक अभिशाप बन चुका है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि 2014 के बाद भारत ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देगा, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
पाकिस्तान का दुर्भाग्य फिर भी उसी राह पर
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विदेश मंत्री ने एक अन्य महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि मुंबई हमले ने भारत के लोगों की सोच बदल दी। उस हमले के बाद सभी राजनीतिक दलों और जनता की यह मांग बन गई कि भारत को कठोर रुख अपनाना चाहिए। जयशंकर ने कहा कि दुर्भाग्य से पाकिस्तान आज भी अपनी पुरानी आदतें नहीं छोड़ पाया है और उसी राह पर चल रहा है, जिससे वह खुद को ही हानि पहुंचा रहा है।
26/11 को बताया बड़ा मोड़
उन्होंने कहा कि मुंबई हमला भारत के लिए चेतावनी की तरह था। इसके बाद देश में यह भावना बनी कि अब और सहन नहीं किया जाएगा और तब से आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति और भी सख्त हो गई।
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अमेरिका से सहयोग पर जताई संतुष्टि
तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण पर जयशंकर ने कहा कि यह 26/11 के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है। साथ ही उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते आतंकवाद विरोधी सहयोग को सराहा।
