यासीन मलिक पर क्यों ‘मौन’ थी सरकारें? महबूबा के खत से खुले कई पुराने राज; शाह से कर डाली बड़ी मांग
Yasin Malik ने बताया कि वो हृदय और गुर्दे की गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। अब इस पर Jammu-Kashmir की पूर्व CM Mehbooba Mufti ने अमित शाह को पत्र लिखकर मामले मानवता का अनुरोध किया है।
- Written By: सौरभ शर्मा
यासीन मलिक को लेकर महबूबा का शाह को पत्र (फोटो- सोशल मीडिया)
Mehbooba Mufti Appeal to Amit Shah for Yasin Malik: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। इस पत्र में उन्होंने आतंकी-वित्तपोषण मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे प्रतिबंधित JKLF सुप्रीमो यासीन मलिक के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। मुफ्ती ने दावा किया है कि एक समय था जब मलिक ने हिंसा का रास्ता छोड़कर भारत सरकार के साथ मिलकर शांति का रास्ता चुना था, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह पत्र उस समय सामने आया है जब यासीन मलिक ने अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया है। मलिक का दावा है कि वह हृदय और गुर्दे की गंभीर बीमारियों से पीड़ित है। महबूबा मुफ्ती ने अपने पत्र में कहा कि भले ही वह मलिक की राजनीतिक विचारधारा से असहमत हों, लेकिन इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि उसने हिंसा त्यागकर राजनीतिक संवाद का साहसी रास्ता चुना था। मलिक को फरवरी 2019 में गिरफ्तार किया गया था और वह रुबैया सईद अपहरण और वायुसेना कर्मियों पर हमले जैसे कई गंभीर मामलों का सामना कर रहा है।
I’ve written to Shri Amit Shah ji to view Yasin Malik’s case through a humanitarian lens. While I differ with his political ideology, one cannot ignore the courage it took him to renounce violence and choose the path of political engagement and non violent dissent . pic.twitter.com/vbAMeHYDIv — Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) September 19, 2025
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जब सरकारें करती थीं मलिक पर भरोसा
महबूबा मुफ्ती ने अपने पत्र में कुछ चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने लिखा है कि 1994 में यासीन मलिक का हथियार छोड़ने का फैसला एकतरफा नहीं था, बल्कि इसे भारतीय एजेंसियों द्वारा प्रोत्साहित किया गया था। उन्होंने कहा कि मलिक को 32 टाडा मामलों में जमानत दी गई थी और नरसिम्हा राव से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और यहां तक कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल तक, लगभग 25 वर्षों तक इस मौन सहमति का सम्मान किया गया। इस दौरान मलिक ने वरिष्ठ अधिकारियों और खुफिया कर्मियों के साथ कई वार्ताएं भी कीं।
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एक मौका दें, नहीं तो टूट जाएगा भरोसा
अपने पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री ने अगस्त 2019 के बाद बदले हालात का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि इसके बाद पुराने मामलों को फिर से खोला गया और JKLF पर प्रतिबंध लगा दिया गया। जिस व्यक्ति को कभी शांति के लिए एक कड़ी के रूप में देखा जाता था, उसे आतंकवादी के रूप में पेश किया गया। महबूबा मुफ्ती ने शाह से अपील की है कि वे मलिक के मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार करें। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर शांति का रास्ता चुनने वाले व्यक्ति के लिए दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर दिए गए, तो कश्मीर में बातचीत के लिए जरूरी नाजुक भरोसा टूट जाएगा।
