मनमोहन सिंह की लव स्टोरी
नई दिल्लीः पूर्व प्रधानमंत्री ‘मनमोहन’ सिंह सदा के लिए मौन हो गए हैं। पूरा राष्ट्र शोक में डूबा हुआ है। एक आम घर का लड़का जिसने अपने जीवन देश को आगे बढ़ाने में ऐतिहासिक योगदान दिया। डॉ. सिंह को एक सज्जन, ईमानदार और बेहतरीन अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री के रूप में सब जानते हैं, लेकिन उनके जीवन के कई ऐसे पहलू भी हैं, जिससे उनके चाहने वाले अनजान हैं। इस लेख में उनके जीवन से जुड़ी कुछ कहनियों को साझा करेंगे।
किस्सा उन दिनों का है, जब मनमोहन सिंह कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते थे। पूर्व पीएम डॉ. सिंह की लव स्टोरी का जिक्र करते हुए उनकी बेटी दमन सिंह अपनी किताब ‘स्ट्रिक्टली पर्सनल: मनमोहन-गुरशरण’ में लिखती हैं। एक समय ऐसा था जब वे एक खास लड़की के ख्यालों में डूबे रहते थे। उस लड़की पर सिंह अपना दिन हार बैठे थे। इसका असर उनकी पढ़ाई पर हो रहा था।
उस लड़की के ख्यालों में खोए हुए मनमोहन सिंह ने कई रिसर्च पेपर लिखे, जो उनके गाइड प्रोफेसर को बिल्कुल पंसद नहीं आए। इसके लिए उनको प्रोफेसर डांट पड़ी, जिससे वह खुद से बेहद निराश हुए। इसके बाद सिंह ने अपने लक्ष्य पर फोकस करना शुरू कर दिया। उन्होंने कसम खाई कि लक्ष्य से कभी नहीं डिगेंगे। सिंह उस लड़की को सदा के लिए भूल गए। इसके बाद के इतिहास से सभी वाकिफ हैं।
गुरु ग्रंथ साहिब से मनमोहन का ‘म’ अक्षर मिला
26 सितम्बर 1932 को पाकिस्तान के पंजाब के गाह में गुरमुख सिंह के घर बेटे का जन्म हुआ। गुरमुख सिंह पत्नी और बच्चे के साथ पेशावर में रहते थे। वे एक ड्रायफ्रूट बेचने वाले व्यापारी के पास क्लर्क थे। सिख प्रथा के अनुसार गुरमुख सिंह बच्चे को लेकर सिखों के पवित्र तीर्थ पंजा साहिब गुरुद्वारा पहुंचे। मनमोहन सिंह के माता -पिता ग्रंथी से बच्चे का नाम रखने को कहा। तो उन्होंने जो पेज खोला उसका पहला शब्द ‘म’ से था। ग्रंथी डॉ. सिंह को मनमोहन दिया। हालांकि उन्हें उनके बचपन के दोस्त व आसपास के लोग पूरे नाम से नहीं बुलाते थे। उन्हें सिर्फ मोहन कह कर संबोधित करते थे।