PM मोदी के मणिपुर दौरे की सुगबुगाहट से पहले बड़ी बगावत, 43 भाजपाईयों ने कर दी बेवफाई
Manipur भाजपा के सदस्यों ने एक बयान में कहा कि वे पार्टी के भीतर वर्तमान स्थिति को लेकर बहुत चिंतित हैं BJP के जमीनी स्तर के नेतृत्व के प्रति सम्मान की कमी को लेकर इस कदम के पीछे प्रमुख कारण बताया।
- Written By: सौरभ शर्मा
PM मोदी के दौरे से पहले मणिपुर BJP में बड़ी बगावत (फोटो- सोशल मीडिया)
Manipur Political Crisis: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मणिपुर के बहुप्रतीक्षित दौरे से ठीक पहले राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इकाई में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। उखरुल जिले के फुंग्यार विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के 43 सदस्यों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है, जिससे राज्य में नई सरकार के गठन की अटकलों पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस सामूहिक इस्तीफे ने राज्य की नाजुक राजनीतिक स्थिति को और भी कठिन बना दिया है, जो मई 2023 से जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को मणिपुर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। मई 2023 में जातीय हिंसा भड़कने के बाद यदि पीएम पहुंचते है तो यह उनका पहला मणिपुर दौरा होगा। इस हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। इस्तीफे देने वालों में फुंग्यार मंडल अध्यक्ष, महिला मोर्चा, युवा मोर्चा और किसान मोर्चा के प्रमुखों के साथ-साथ कई बूथ अध्यक्ष भी शामिल हैं, जो पार्टी के भीतर की कलह का संकेत देता है।
क्यों हुई यह सामूहिक बगावत?
इस्तीफा देने वाले भाजपा सदस्यों ने एक संयुक्त बयान जारी कर पार्टी के भीतर की मौजूदा कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। बयान के अनुसार, “परामर्श, समावेशिता और जमीनी स्तर के नेतृत्व के प्रति सम्मान की कमी” इस कठोर कदम के पीछे के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी और उसकी विचारधारा के प्रति उनकी निष्ठा हमेशा अटूट रही है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों ने उन्हें यह निर्णय लेने के लिए मजबूर किया। वे अपने समुदाय और मणिपुर के लोगों के कल्याण के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम हैं।
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राष्ट्रपति शासन और सरकार गठन की कवायद
गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू है। प्रधानमंत्री के दौरे को राज्य में शांति बहाली और एक नई लोकतांत्रिक सरकार के गठन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा था। इस दौरे से पहले नई सरकार के गठन को लेकर कयास भी लगाए जा रहे थे, लेकिन इस सामूहिक इस्तीफे ने पूरी प्रक्रिया पर पानी फेर दिया है। यह इस्तीफा पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र और नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिसका असर भविष्य की राजनीतिक गतिविधियों पर पड़ना तय है। अब देखना यह होगा कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है और प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान क्या राजनीतिक समाधान निकलता है।
