कैसे सामने आया ‘जहर’ का सच? 23 बच्चों की जान लेने वाली कंपनी का मालिक गिरफ्तार, जानिए अब तक क्या हुआ
Madhya Pradesh पुलिस ने कफ सिरप मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए श्रीसन मेडिकल्स के मालिक रंगनाथन को हिरासत में ले लिया। पूरे केस में लगातार नए अपडेट सामने आते रहे है। आइए इसको विस्तार से समझते हैं।
- Written By: सौरभ शर्मा
23 बच्चों की जान लेने वाली कंपनी का डायरेक्टर गिरफ्तार
Coldrif cough syrup case all details: मध्य प्रदेश में 23 मासूमों की जान लेने वाले जहरीले कफ सिरप मामले में एक बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी ने बुधवार-गुरुवार की रात चेन्नई में दबिश देकर सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के डायरेक्टर गोविंदन रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया है। रंगनाथन पर 20 हजार रुपए का इनाम घोषित था और वह लंबे समय से अपनी पत्नी के साथ फरार चल रहा था। इस गिरफ्तारी को मामले की जांच में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, जिसने पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस त्रासदी की शुरुआत सितंबर महीने में छिंदवाड़ा के परासिया इलाके से हुई, जब 7 सितंबर के बाद एक-एक कर कई बच्चों की मौत होने लगी। करीब छह बच्चों की मौत के बाद 23 सितंबर को प्रशासन हरकत में आया और जांच शुरू की। शुरुआती जांच में पता चला कि सभी बच्चों की मौत किडनी फेल होने से हुई थी और इन सभी ने कोल्ड्रिफ नाम का कफ सिरप पिया था। यह सिरप तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी में बनता था, जिसके बाद जांच का दायरा मध्य प्रदेश से तमिलनाडु तक फैल गया।
कैसे सामने आया ‘जहर’ का सच?
मामले की गंभीरता को देखते हुए तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल विभाग ने कंपनी के सिरप की जांच की। 3 अक्टूबर को आई लैब रिपोर्ट ने सबके होश उड़ा दिए। रिपोर्ट में पाया गया कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप में 48.6% डायथिलीन ग्लाइकॉल नामक जहरीला केमिकल था, जबकि इसकी स्वीकार्य मात्रा 0.1% से भी कम होती है। इस खुलासे के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने 4 अक्टूबर को सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके तुरंत बाद, सिरप लिखने वाले परासिया के सरकारी डॉक्टर प्रवीण सोनी और कंपनी के संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और डॉक्टर सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया।
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गिरफ्तारी, सियासत और बड़ी चूक
डॉक्टर की गिरफ्तारी का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने विरोध किया और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर कहा कि असली दोषी निर्माता कंपनी और व्यवस्था है। इस बीच, मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने तमिलनाडु सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने नॉन-फार्मास्यूटिकल ग्रेड का केमिकल खरीदा था और फैक्ट्री में गंदगी के बीच दवा बन रही थी। इन सभी घटनाओं के बीच, एसआईटी ने आखिरकार मुख्य आरोपी डायरेक्टर गोविंदन रंगनाथन को चेन्नई से गिरफ्तार कर लिया।
