LPG के लिए लाइन में खड़े लोग (Image- Social Media)
LPG Crisis in India: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। करीब 2100 किलोमीटर दूर चल रहे तनाव, खासकर ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच टकराव के बाद तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका असर भारत के कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता पर देखने को मिल रहा है। गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं।
जहां पहले घरेलू गैस सिलेंडर करीब 900 से 1000 रुपये में मिल जाता था, वहीं कई जगह लोग इसे 2000 से 3000 रुपये तक में खरीदने को मजबूर हैं। हालांकि सरकार लगातार यह कह रही है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन अफवाहों और जमाखोरी की वजह से कई लोग कालाबाजारी का शिकार हो रहे हैं।
सरकार ने एलपीजी की कमी की खबरों को अफवाह बताया है और कहा है कि देश में पर्याप्त गैस उपलब्ध है। लेकिन कुछ शहरों में कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बाधित होने से होटल और रेस्टोरेंट कारोबार प्रभावित हुआ है। बेंगलुरु, मुंबई, पुणे, जयपुर, दिल्ली, नोएडा, पटना, भोपाल और कोलकाता जैसे शहरों में होटल और रेस्टोरेंट मालिकों को गैस की आपूर्ति पूरी तरह नहीं मिल पा रही है।
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के दिल्ली अध्यक्ष संदीप आनंद गोयल के अनुसार कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने से कारोबार पर असर पड़ रहा है। कई जगह PNG पाइपलाइन में गैस का दबाव लगभग 20% तक कम कर दिया गया है। 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने के कारण कई होटल और रेस्टोरेंट अस्थायी रूप से बंद किए जा रहे हैं।
कुछ रेस्टोरेंट्स ने अपने मेन्यू को सीमित कर दिया है और केवल चाय-कॉफी परोस रहे हैं। वहीं बेंगलुरु के कुछ होटल संचालकों ने गैस की कमी के कारण लकड़ी और कोयले पर खाना बनाना शुरू कर दिया है।
मिडिल ईस्ट के तनाव के बावजूद घरेलू सिलेंडर की सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि कॉमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति थोड़ी कम की गई है। ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर फेडरेशन के प्रमुख पीएन सेठ के मुताबिक यह समस्या अस्थायी है।
दिल्ली-एनसीआर में कॉमर्शियल गैस सप्लाई प्रभावित होने से करीब 70% रेस्टोरेंट प्रभावित हुए हैं। वहीं नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष जोरावर कालरा के अनुसार गैस सप्लाई में बाधा से रेस्टोरेंट उद्योग को रोजाना लगभग 1200 से 1300 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है।
भारत गैस के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर है और इसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। इसी वजह से सरकार ने एलपीजी पर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू कर दिया है ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी को रोका जा सके।
इसके बावजूद कुछ राज्यों में लोगों को सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है। उत्तर प्रदेश में कई जगह बुकिंग के 4–5 दिन बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं और लोग सुबह तड़के गैस एजेंसियों के बाहर लाइन लगाकर खड़े हो रहे हैं।
सरकार ने आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं-
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सरकार का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि देश में लगभग तीन सप्ताह का गैस भंडार मौजूद है। साथ ही वैकल्पिक आयात के लिए ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका और अल्जीरिया जैसे देशों से संपर्क किया जा रहा है। गैस आपूर्ति की निगरानी के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति भी बनाई है, ताकि देश में ईंधन की उपलब्धता सुचारु रूप से बनी रहे। फिलहाल तीन हफ्ते के लिए तो सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक है। अगर ये युद्ध लंबा चला तो देश में परेशानी हो सकती है।