टेनिस कोर्ट की चैंपियन से देश की सबसे धाकड़ IPS बनने का सफर, किरण बेदी के जीवन का वो सच जो कोई नहीं जानता
Happy Birthday Kiran Bedi: देश की पहली महिला IPS अधिकारी किरण बेदी का आज 77वां जन्मदिन है। किरण बेदी का जीवन वर्तमान समय में देश के करोड़ों युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक माना जाता है।
- Written By: स्निग्धा श्रीवास्तव
किरण बेदी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Kiran Bedi Birthday: एक वक्त था जब पर्दा प्रथा, बाल विवाह और सती प्रथा जैसी तमाम कुप्रथाओं और दकियानूसी कुरीतियों की जंजीरों ने महिलाओं को जकड़ रखा था। लेकिन इतिहास गवाह है कि इन्ही कुरीतियों और पुरूष प्रधान देश के बीच महत्वाकांक्षी महिलाओं ने अपनी अलग पहचान बनाई।
उन्ही महत्वाकांक्षी महिलाओं में से एक है भारत की पहली महिला IPS अधिकारी किरण बेदी। जो किसी परिचय की मोहताज नहीं है। बेदी से पहले पुलिस प्रशासनिक सेवा में किसी महिला की सहभागिता नहीं थी। लेकिन आईपीएस को लक्ष्य बनाते हुए किरण बेदी ने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की और परीक्षा को पास कर देश की अन्य महिलाओं को भी पुलिस प्रशासनिक सेवा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
भारतीय पुलिस बल गौरव और भारत की पहली सर्वोच्च रैंक वाली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी आज अपना 77वां जन्मदिन मनाने जा रही है। आइए जानते है किरन बेदी के जीवन के कुछ रोमांचक किस्से-
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व्यक्तिगत जीवन और विवाह
किरण बेदी का जन्म 9 जून 1949 में अमृतसर में हुआ था। उनके पिता का नाम प्रकाश ला पेशावरिया और मां का नाम प्रेमलता है। किरण बेदी की तीन बहनें हैं- शशि, रीटा और अनु। किरण बेदी को लोग प्यार से किमी कहकर बुलाते थे। किरण के परदादा लाला हरगोबिंद पेशावरिया पेशावर के रहने वाला थे लेकिन 1860 में पेशावर से अमृतसर आ गए थे। बेदी के पिता प्रकाश लाल परिवार के कपड़ा व्यवसाय में मदद करते थे साथ ही टेनिस भी खेलते थे।
किरण बेदी की शादी ब्रृज बेदी से हुई थी। किरण बेदी की एक बेटी भी है जिसका नाम साइना है। साइना एक सोशल वर्कर है और वह कई एनजीओ चलातीं हैं।
शिक्षा
बेदी ने 1954 में अमृतसर के सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई की। बेदी ने 1968 में अमृतसर के गवर्नमेंट कॉलेज फॉर विमेन से इंग्लिश में बैचलर ऑफ आर्ट्स (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की। उसी साल बेदी को NCC कैडेट ऑफ़िसर अवॉर्ड मिला। 1970 में, उन्होंने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की।
1970 से 1972 तक, बेदी ने अमृतसर के खालसा कॉलेज फॉर विमेन में लेक्चरर के तौर पर कार्य किया। बाद में, इंडियन पुलिस सर्विस में अपने करियर के दौरान, उन्होंने 1988 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के लॉ फ़ैकल्टी से बैचलर ऑफ लॉ की डिग्री और 1993 में नई दिल्ली में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी – दिल्ली के ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंसेज डिपार्टमेंट से डॉक्टरेट ऑफ फ़िलॉसफ़ी की डिग्री भी हासिल की। साल 1993 में किरण बेदी आईआईटी दिल्ली से समाज विज्ञान विभाग से पीएचडी की उपाधि हासिल की।
टेनिस में बनी एशियन चैंपियन
किरण के पिता टेनिस खिलाड़ी थे। यही वजह है कि किरण को भी टेनिस खेलने का शौक था। अमृतसर में पढ़ाई के दौरान किरण बेदी ने टेनिस खेलना शुरू किया और एशियन चैंपियन भी बन गईं। किरण के पति भी टेनिस प्लेयर थे।
किरण बेदी क्यों बनी आईपीएस
बताते चले कि बचपन से ही किरण बेदी के अंदर देश के लिए और देश की बेटियों के लिए कुछ करने का जुनून सवार था। दहेज के मामले और लड़कियों के साथ छेड़खानी जैसी वारदातों को देखने के बाद उनके अंदर महिलाओं के लिए कुछ करने की इच्छा जागी। उन्होंने हमेशा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
करियर और अवार्ड्स
1972 में उनकी शादी के कुछ महीनों बाद ही किरण ने जुलाई में आईपीएस की ट्रेनिंग ली और उनकी पोस्टिंग दिल्ली में हो गई। 16 जुलाई 1972 को, किरण बेदी ने मसूरी में राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में पुलिस प्रशिक्षण शुरू किया और फिर पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनीं। 6 महीने के फाउंडेशन कोर्स के बाद, उन्होंने राजस्थान के माउंट आबू में, 9 महीने का पुलिस प्रशिक्षण लिया और 1974 में पंजाब पुलिस के साथ आगे का भी प्रशिक्षण लिया। 1975 में उन्हें चाणक्यपुरी, दिल्ली में पोस्टिंग मिली इतना ही नहीं 1975 में ही गणतंत्र दिवस परेड में उन्होंने दिल्ली पुलिस के सभी पुरुष दल का नेतृत्व किया।
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35 वर्षों की सर्विस के दौरान बेदी ने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम करके कई अपराधियों के छक्के छुड़ा दिए थे। किरण बेदी को अपनी अभूतपूर्व सेवाओं के लिए 1979 में राष्ट्रपति के Gallantry Award और वुमन ऑफ द इयर के सम्मान से नवाजा गया। 1991 में उन्हें नशाबंदी की मुहिम में अहम भुमिका निभाने के लिए Asia Region Award for Drug Prevention and Control से सम्मानित किया गया। इतना ही नहीं 1995 में उन्हें लॉयन ऑफ द इयर, महिला शिरोमणि अवॉर्ड से भी नवाजा गया।
किरण बेदी का राजनीतिक कैरियर
किरण बेदी सिर्फ एक तेज तर्रार महिला ऑफिसर ही नहीं थी। उन्होंने राजनीति में भी कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की। 2015 में किरण बेदी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गईं। उन्होंने पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में दिल्ली विधान सभा चुनाव लड़ा। हालांकि वह चुनाव में हार गई। कुछ समय बाद मई 2016 में उन्होंने पुडुचेरी के उपराज्यपाल का कार्यभार संभाला।
किरण बेदी से कैसे बनी ‘क्रेन बेदी’
दरअसल किरण बेदी ने अपनी आईपीएस सेवा के दौरान दिल्ली की सड़कों को जाम मुक्त कराने संकल्प लिया। इस दौरान वह अवैध रूप से और नो पार्किंग में खड़ी गाड़ियों को क्रेन से उठवा लेती थी। इतना ही नहीं डीसीपी ट्रैफिक रहते उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और सीबीआई के निदेशक तक की गाड़ियां उठा ली थी।
सर्विस में बिल्कुल नया होने के कारण उन्हें दिल्ली की सड़कों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इसलिए वह खुद अपने सहयोगियों के साथ दिल्ली का नक्शा लेकर घूमती थी। बेदी ने अपनी पुस्तक ‘निर्भीक प्रशासन’ के विमोचन इस बात का खुलासा करते हुए बताया था इस अभियान के लिए जब सड़क पर निकली थी तो भीड़ दौड़ने लगी। और जब किसी ने रिक्शे वाले से पूछा कि क्या हुआ? तो उसने कहा कि ‘क्रेन बेदी’ आ गई है। तभी से उनका नाम ‘क्रेन बेदी’ पड़ गया।
