सिखों के हितों में उठाए गए मोदी के कदमों से खालिस्तानी आंदोलन कमजोर हुआ: सिख प्रतिनिधिमंडल
- Written By: दामिनी सिंह
File Photo
वाशिंगटन : सिख अमेरिकियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने यहां यात्रा पर आई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से सिख समुदाय के हित में उठाए गए कदमों के कारण पृथक खालिस्तानी आंदोलन कमजोर हुआ है। जसदीप (जस्सी) सिंह और कंवलजीत सिंह की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने पारंपरिक सरोपा, स्मृति चिन्ह और फूलों का गुलदस्ता सीतारमण को देकर उन्हें सम्मानित किया।
पिछले नौ वर्षों में सिख समुदाय की कई मांगों को लागू करने के लिए मोदी सरकार की सराहना करते हुए जस्सी सिंह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के इन कदमों के चलते अमेरिका में खालिस्तानी आंदोलन कमजोर हुआ है। सीतारमण के साथ मुलाकात के बाद मीडिया में जारी बयान में सिंह के हवाले से कहा गया है, “ पूरे अमेरिका में मुट्ठी भर खालिस्तानी ही हैं जिनकी वजह से पूरे सिख समुदाय की बदनामी हो रही है।”
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सिख राष्ट्रवादी हैं और अखंड भारत के साथ खड़े हैं और सिखों से संबंधित सभी मुद्दों को भारत के ढांचे और संविधान के दायरे में हल किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि उन्होंने वित्त मंत्री से पंजाब पर उग्रवाद के दौरान चढ़े भारी कर्ज को माफ करने का अनुरोध किया और पंजाब को उद्यम क्षेत्र घोषित करने की मांग की जहां उद्योगों में निवेश किया जा सके ताकि पंजाब के युवाओं के पास अच्छा भविष्य हो।
सम्बंधित ख़बरें
नवभारत विशेष: लगातार महंगा होता जा रहा पेट्रोल-डीजल, 11 दिनों में 4 बार दाम बढ़ाए
शेयरों पर टैक्स सिस्टम पर पुनर्विचार को तैयार सरकार, वित्त मंत्री ने LTCG या STT हटाने के दिए संकेत
पेट्रोल-डीजल की महंगाई के बीच क्या है वित्त मंत्री का ‘3F Formula’? जिसने बदल दी ग्लोबल मार्केट की टेंशन
Khalistani Gangs पर बड़ी कार्रवाई! कनाडा में एक्सटॉर्शन नेटवर्क का भंडाफोड़, वांटेड अपराधियों की लिस्टी जारी
‘ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी टीम’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए प्रसाद की अगुवाई में इसके एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान सीतारमण ने बताया कि मोदी सरकार कैसे भारत में बदलाव लाई है और इसे प्रगति के पथ पर ले कर गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस स्थिर विकास को बनाए रखने और मोदी के भारत के ‘अमृत काल’ के सपने को पूरा करने के लिए, आगामी संसदीय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मोदी को पूर्ण बहुमत से जीतना जरूरी है। (एजेंसी)
