मोदी सरकार के एक और फैसले को चुनौती देगी केरल की वामपंथी सरकार, पिनाराई विजयन पेश करेंगे एक और बिल
कुछ दिन पहले ही केरल की सरकार ने वन नेशन वन इलेक्शन के खिलाफ एक विधेयक पारित किया था और अब केरल की सरकार वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ एक और विधेयक लाने जा रही है। केरल विधानसभा में आज पिनाराई विजयन की सरकार वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने वाली है।
- Written By: विजय कुमार तिवारी
CM पिनाराई विजयन और PM नरेन्द्र मोदी (सौ. से सोशल मीडिया)
नई दिल्ली : केरल की वामपंथी सरकार एक बार फिर केंद्र सरकार के एक और फैसले के खिलाफ राज्य विधानसभा में बिल पेश करने की तैयारी कर रही है। केरल में पिनाराई विजयन की सरकार वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है। पिनाराई विजयन की सरकार 10 अक्टूबर को वन नेशन वन इलेक्शन के खिलाफ बिल पेश करके उसे पास किया था और अब वह वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ नए विधेयक लाकर विरोध करना चाहती है। केरल की सीपीआईएम की सरकार केंद्र सरकार के एक और फैसले की खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने की एक और कोशिश कर रही है।
कुछ दिन पहले ही केरल की सरकार ने वन नेशन वन इलेक्शन के खिलाफ एक विधेयक पारित किया था और अब केरल की सरकार वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ एक और विधेयक लाने जा रही है। केरल विधानसभा में आज पिनाराई विजयन की सरकार वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने वाली है।
केरल विधानसभा में 4 दिन पहले 10 अक्टूबर को एक देश एक चुनाव के खिलाफ बिल पेश किया गया था। हालांकि उस समय सदन में मुख्यमंत्री के न होने से विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री एमबी राजेश ने प्रस्ताव पेश किया था, जिसके बाद में सदन ने पास भी कर दिया था। केरल के संसदीय कार्य मंत्री एमबी राजेश ने कहा कि यह लोकतंत्र की चुनी सरकारों पर हमला है, जिन संस्थाओं ने चुनाव के बाद अपना 5 साल का कार्यकाल नहीं पूरा किया है, उसे भी सरकार खत्म करना चाहती है। यह स्थानीय स्वशासी संस्थाओं के लिए के अधिकारों पर संवैधानिक हमला जैसा है। यह हमारे देश के संघीय ढांचा व्यवस्था को कमजोर करता है। इसलिए हम लोग इसका विरोध करने का फैसला किया है।
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केरल के संसदीय मंत्री ने कहा कि जब खर्च कम करने और शासन को आसान बनाने के लिए दूसरे उपाय किए जा सकते हैं तो संविधान पर आधारित संघीय प्रणाली को नष्ट करके राज्य सरकार और स्थानीय स्वशासन के अधिकारों को कम करना कहां तक उचित है। संसदीय कार्य मंत्री एमबी राजेश ने यह भी कहा कि संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ बनाया गया यह बिल केंद्र के नियम कानून थोपने और आरएसएस बीजेपी के एजेंडे को पूरे देश में लागू करने का प्रयास है। हम इसमें लोकतांत्रिक सुधार प्रक्रिया को अपना सकते हैं। वैसे भी विपक्ष इस प्रस्ताव में कई संशोधन दिए थे, जिनमें से सरकार ने केवल कुछ को स्वीकार किया। कुछ संशोधनों को सरकार ने अभी तक नहीं स्वीकार किया है। इसलिए हम लोग इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे हैं।
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