

Karnataka HC Metro Photo Controversy: मेट्रो में यात्रा के दौरान महिलाओं के बिना जानकारी के फोटो-वीडियो लेकर उसे सोशल मीडिया में पोस्ट करने के मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उस आदमी की याचिका को खारिज कर दिया। इसमें उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी। जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने युवक की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए मौखिक रूप से कहा कि यह क्या बकवास है, तुम महिलाओं की तस्वीरें लेते हो और पोस्ट करते हो। तुम किस तरह के आदमी हो। वकील की दलील पर जस्टिस नागप्रसन्ना ने कड़ी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि आपने तस्वीरें क्यों खींचीं, आप महिलाओं को कहीं भी सुरक्षित नहीं छोड़ते। इसके जवाब में याची के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस खुद इस मामले में शिकायतकर्ता है। साथ ही वकील ने यह भी कहा कि मेट्रो अधिकारियों के पास मौजूद सीसीटीवी फुटेज का भी वेरिफिकेशन किया जा सकता है। इसका जवाब देते हुए कोर्ट ने कहा कि तकनीकी आधार पर ऐसे कृत्यों को रद्द नहीं किया जा सकता है। अब समय आ गया है कि कुछ मामलों में हमें तकनीकी बारीकियों के आधार पर निर्णय लेना बंद कर देना चाहिए। मैं ऐसी बातों को होने नहीं दूंगा।
बेंगलुरू पुलिस ने युवक के खिलाफ बीएनएस की धारा 78 (2) (पीछा करना) और आईटी अधिनियम की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित करना और प्रसारित करना) के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवक रोज पीन्या से इंदिरा नगर तक मेट्रो से आता जाता है। इस दौरान उसने अनजान महिलाओं के फोटो-वीडियो बनाए। बाद में उसे एक इंस्टाग्राम हैंडल पर ऑनलाइन पोस्ट कर दिया। फिलहाल इस अकाउंट को अब ब्लॉक कर दिया गया है। युवक द्वारा इंस्टाग्राम पेज पर 13 वीडियो अपलोड किए गए थे। इसमें कमेंट डिसेबल किया गया था। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया विरोध होने लगा। इसके बाद पेज से सभी पोस्ट डिलीट कर दिया गया था। एक यूजर ने बेंगलुरू पुलिस को टैग करते हुए इसकी शिकायत की थी।
इस पर पुलिस ने कार्रवाई की। मामले में अभियुक्त की पैरवी कर रहे वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि युवक द्वारा पोस्ट की गई तस्वीरों में कुछ भी अश्लील नहीं दिखाया गया था।