Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्य प्रदेश
  • विदेश
  • चुनाव
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • रवि, 26 जुलाई 2026
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • ई-पेपर
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

Kargil Vijay Diwas: ऑपरेशन बद्री से ऑपरेशन विजय तक, जब पाकिस्तान के हर छल पर भारी पड़ा भारतीय वीरों का पराक्रम

Kargil Vijay Diwas: पाकिस्तानी घुसपैठ का मकसद कश्मीर और लद्दाख के बीच का लिंक तोड़ना और भारतीय सेना को सियाचिन ग्लेशियर से पीछे हटाना था, जिससे भारत को कश्मीर विवाद को सुलझाने के लिए मजबूर होना पड़े।

  • Written By: मनोज आर्या
Updated On: Jul 26, 2026 | 08:05 AM

कारगिल विजय दिवस 2026, (AI जेनरेटेड इमेज)

Follow Us
Follow Us:

Kargil Vijay Diwas 2026 Special: भारत में हर साल 26 जुलाई को ‘कारगिल विजय दिवस’ मनाया जाता है। यह 1999 में लद्दाख के उत्तरी कारगिल जिले की पहाड़ियों की चोटियों पर पाकिस्तानी सेना को उनके कब्जे वाली जगहों से बाहर निकालने के लिए कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत की याद में मनाया जाता है। शुरुआत में पाकिस्तानी सेना ने युद्ध में अपना हाथ होने से इनकार करते हुए कहा था कि यह कश्मीरी मिलिटेंट्स की वजह से हुआ था। हालांकि, युद्ध में मारे गए लोगों के पास से मिले सबूतों और बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पाकिस्तान आर्मी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ परवेज मुशर्रफ के बयानों ने जनरल अशरफ राशिद के नेतृत्व वाली पाकिस्तानी पैरामिलिट्री फोर्स के शामिल होने की ओर इशारा किया।

कारगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को कारगिल युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों के सम्मान में मनाया जाता है। यह दिन पूरे भारत में और राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में मनाया जाता है, जहां भारत के प्रधानमंत्री हर साल इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति पर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हैं। भारतीय सशस्त्र बलों के योगदान को याद करने के लिए पूरे देश में समारोह आयोजित किए जाते हैं।

1971 युद्ध के बाद भारत-पाक का सीधा मुकाबला

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद दोनों देशों की मिलिट्री सेनाओं के बीच लंबे समय तक बहुत कम सीधी लड़ाई हुई। भले ही दोनों देशों ने सियाचिन ग्लेशियर पर कंट्रोल करने के लिए आस-पास की पहाड़ियों पर मिलिट्री चौकियां बनाने की कोशिश की हो और 1980 के दशक में इसके नतीजे में मिलिट्री झड़पें हुई हों। हालांकि, 1990 के दशक में, कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों की वजह से बढ़ते तनाव और लड़ाई, साथ ही 1998 में दोनों देशों के न्यूक्लियर टेस्ट करने से लड़ाई का माहौल और भी बढ़ गया।

सम्बंधित ख़बरें

Kargil Vijay Diwas: कारगिल के वो 5 वीर, जिन्होंने मेरठ का नाम इतिहास में अमर कर दिया, पढ़ें उनकी शौर्यगाथा

Assam Flood: असम में सेना ने तेज किया राहत और बचाव अभियान, 700 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया

Assam Floods: असम में बाढ़ से हालात बेहद खराब, अब तक 5 की मौत और 3.63 लाख लोग प्रभावित

पहले बताओ कारगिल में कितने मरे… पाकिस्तानी मौलाना ने आसिम मुनीर की निकाली हेकड़ी, कुरेदा 27 साल पुराना जख्म

1999 में द्रास सेक्टर में मिशन पूरा होने के बाद 7 पैरा के विजयी सैनिक, (सोर्स- सोशल मीडिया)

इस स्थिति में भारत-पाक ने फरवरी 1999 में लाहौर डिक्लेरेशन पर साइन किए, जिसमें कश्मीर विवाद का शांतिपूर्ण और दोनों देशों के बीच हल निकालने का वादा किया गया था। 1998-1999 की सर्दियों में पाकिस्तानी आर्म्ड फोर्सेज के कुछ लोग लाइन ऑफ कंट्रोल के भारतीय हिस्से में पाकिस्तानी सैनिकों और पैरामिलिट्री फोर्सेज को चुपके से ट्रेनिंग दे रहे थे और भेज रहे थे। इस घुसपैठ का कोडनेम ‘ऑपरेशन बद्री’ था।

भारत को सियाचिन से पीछे हटाना चाहता था पाक

पाकिस्तानी घुसपैठ का मकसद कश्मीर और लद्दाख के बीच का लिंक तोड़ना और भारतीय सेना को सियाचिन ग्लेशियर से पीछे हटाना था, जिससे भारत को बड़े कश्मीर विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत करने पर मजबूर होना पड़ा। पाकिस्तान का यह भी मानना ​​था कि इस इलाके में कोई भी तनाव कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बना देगा, जिससे उसे जल्द हल निकालने में मदद मिलेगी। एक और मकसद भारतीय राज्य कश्मीर में दस साल से चल रहे विद्रोह का हौसला बढ़ाना हो सकता है, जिसमें प्रोएक्टिव भूमिका निभाई जा सकती है।

कारगिल युद्ध में शहीद भारतीय जवानों को समर्पित कारगिल यार मेमोरियल, (सोर्स- सोशल मीडिया)

शुरू में घुसपैठ के तरीके और प्लानिंग के बारे में ज्यादा जानकारी न होने की वजह से इलाके में मौजूद भारतीय सैनिकों ने मान लिया कि घुसपैठिए जिहादी हैं और उन्होंने ऐलान किया कि वे कुछ ही दिनों में उन्हें बाहर निकाल देंगे। बाद में LOC पर दूसरी जगहों पर घुसपैठ का पता चलने और घुसपैठियों के इस्तेमाल किए गए तरीकों में अंतर के कारण भारतीय सेना को एहसास हुआ कि हमले का प्लान बहुत बड़े पैमाने पर था। घुसपैठ से कब्जा किया गया कुल इलाका आम तौर पर 130 किलोमीटर वर्ग- 200 किलोमीटर वर्ग के बीच माना जाता है।

यह भी पढ़ें: प्रह्लाद जोशी देश के नए शिक्षा मंत्री बने, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मोदी सरकार का बड़ा फैसला

कारगिल में युद्ध में शहीद हुए थे 527 जवान

भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय के साथ जवाब दिया, जिसमें 200,000 भारतीय सैनिक शामिल हुए। यह युद्ध 26 जुलाई, 1999 को पाकिस्तानी सेना के सैनिकों को उनके कब्जे वाली जगहों से निकालने के साथ अधिकारिक तौर पर खत्म हुआ, इस तरह इसे कारगिल विजय दिवस के तौर पर मनाया गया। युद्ध के दौरान भारतीय सेना के 527 जवान शहीद हुए थे।

Kargil vijay diwas 2026 when indian army defeated pakistan army in kargil war 1999

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Jul 26, 2026 | 08:03 AM

Topics:  

  • Indian Army
  • Kargil War
  • Vijay Diwas

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.