

JP Nadda Targets Mallikarjun Kharge On NFHS-6 Data: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच एनएफएचएस-6 डेटा को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने खड़गे का पलटवार करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर कांग्रेस अध्यक्ष पर जन-स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय को लेकर अधूरी जानकारी फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी जानकारी समाज में भ्रम पैदा कर सकती है। उन्होंने एनएफएचएस-6 के आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कार्यों का बचाव किया।
जबकि कांग्रेस ने स्वास्थ्य और पोषण संबंधी डेटा छिपाने का दावा करते हुए आरोप लगाया है कि मोदी सरकार न सिर्फ़ स्वास्थ्य और पोषण के मामले में भारत की महिलाओं और बच्चों के साथ विश्वासघात करती है, बल्कि जान-बूझकर वह ऐसे अहम डेटा को भी छिपाते है जो उसकी नाकामियों को उजागर करता है।
जेपी नड्डा ने 'एक्स' पोस्ट पर लिखा कि खड़गे की अधूरी जानकारी खतरनाक है। जन-स्वास्थ्य का मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है कि केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि केवल राजनीति करने के लिए कुछ डेटा चुनकर दिखाना देश के हित में नहीं है। देश का भला तो केवल तथ्यों के आधार पर होता है। नड्डा ने कहा कि NFHS-6 के आंकड़ों से साफ प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के स्वास्थ्य तंत्र में कितना शानदार बदलाव आया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एनएफएचएस-3 (2005-06) और एनएफएचएस-6 के डाटा की तुलनात्मक रिपोर्ट भी पेश की जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए सुधारों के बारें में वर्णन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, गर्भावस्था की पहली तिमाही में पंजीकरण कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 43.9 फीसदी से बढ़कर 76.2 फीसदी और संस्थागत प्रसव 38.7 फीसदी से बढ़कर 90.6 फीसदी तक पहुंच गया है, जबकि कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में होने वाले प्रसव का प्रतिशत 46.6 फीसदी से बढ़कर 91.3 फीसदी हो गया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पूर्ण टीकाकरण कवरेज 87.1 फीसदी दर्ज किया गया है जबकि स्वास्थ्य बीमा कवरेज 4.9 फीसदी से बढ़कर 60.2 फीसदी तक पहुंच गया है। बच्चों में कुपोषण के प्रमुख संकेतकों में से एक स्टंटिंग की दर 48 फीसदी से घटकर 29.3 फीसदी रह गई है।
उन्होंने कहा कि ये सिर्फ़ आंकड़े नहीं हैं। ये उन लाखों माताओं के बेहतर स्वास्थ्य की कहानी है जिन्हें समय पर देखभाल, सुरक्षित प्रसव और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम मिले हैं।
दरअसल यह पूरा विवाद की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक पोस्ट से शुरू हुआ। जब खड़गे ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार एनएफएचएस-6 के कुछ डेटा को सार्वजनिक नहीं कर रही है। उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार न सिर्फ स्वास्थ्य और पोषण के मामले में महिलाओं और बच्चों के साथ विश्वासघात कर रही है, बल्कि अहम डेटा को भी छिपाया जा रहा है।
खड़गे ने दावा किया कि देश का हर पांच में से एक बच्चा गंभीर कुपोषण का शिकार है। एक-तिहाई बच्चों का वजन कम है और 6 से 23 महीने आयु वर्ग के 84 प्रतिशत बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता। इतना ही नहीं NFHS-5 रिपोर्ट के मुताबिक, 15 से 49 साल की उम्र की 57% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। हर 5 में से 1 महिला कुपोषित है।