कैसे फेल हो गई EOS-09 सेटेलाइट की लॉन्चिंग? ISRO चीफ वी नारायणन ने किया खुलासा, बोले- हम जल्द वापसी करेंगे
ISRO ने आज अपना 101वां मिशन लॉन्च किया लेकिन कुछ तकनीकी समस्या के कारण यह पूरा नहीं हो सका। इस बारे में इसरो प्रमुख वी नारायणन ने जानकारी दी और बताया समस्या कब आई।
- Written By: आकाश मसने
ISRO चीफ वी नारायणन (सोर्स: सोशल मीडिया)
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज अपना 101वां मिशन लॉन्च किया। दो चरणों तक सफलता से प्रदर्शन करने के बाद तीसरे चरण में इसमें कुछ खामियां आई जिससे यह मिशन पूरा नहीं हो पाया। इसरो ने रविवार को EOS-09 सेटेलाइट लॉन्च किया।
इसराे के चीफ वी नारायणन ने पुष्टि की कि रविवार को प्रक्षेपित किए गए ईओएस-09 सेटेलाइट का प्रक्षेपण पूरा नहीं हो सका और वैज्ञानिक पूरे प्रदर्शन का आगे अध्ययन कर रहे हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वी नारायणन ने कहा कि प्रक्षेपण के बाद पहले दो चरणों ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया और तीसरे चरण में समस्या का पता चला।
वी नारायणन ने कहा कि आज हमने PSLV-C61 व्हीकल के लॉन्चिग का प्रयास किया। यह 4-चरणीय व्हीकल है। पहले दो चरणों ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया। तीसरे चरण के दौरान, हम अवलोकन देख रहे हैं। मिशन पूरा नहीं हो सका। हम पूरे प्रदर्शन का अध्ययन कर रहे हैं; हम जल्द से जल्द वापस आएंगे।
सम्बंधित ख़बरें
बाबरी बना जैन मंदिर, कृष्ण नगर के नाम से जाना जाएगा इस्लामपुरा, जानें क्यों सड़कों से मुस्लिम नाम हटा रहा पाक
जिसके चक्कर में हुआ था बेटी का तलाक, उसी पूर्व सास को दामाद ने उतारा मौत के घाट, वजह जानकर कांप उठेगी रूह
लाइव टीवी पर AK-47 चलाने की ट्रेनिंग…ट्रंप की धमकी से ईरान में मचा हड़कंप, आम जनता ने उठाए हथियार- VIDOE
प्यार से मानेंगे तो ठीक वरना…सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर CM योगी की दो टूक, बोले- नहीं चलेगा चौराहे पर तमाशा
इसरो ने भी इसके बारे में एक्स पर पोस्ट किया कि “आज, 101वां प्रक्षेपण का प्रयास किया गया; पीएसएलवी-सी61 का प्रदर्शन दूसरे चरण तक सामान्य था। तीसरे चरण में अवलोकन के कारण, मिशन पूरा नहीं हो सका।”
लॉन्चिंग में होते है कई चरण
PSLV-C61 की उड़ान अनुक्रम में विभिन्न चरण शामिल हैं, जो जमीन पर पीएस1 और पीएसओएम के प्रज्वलन से शुरू होकर विभिन्न खंडों के पृथक्करण और अंत में रॉकेट से उपग्रह के पृथक्करण तक है।
तीसरे चरण में समस्या का पता चला
इसरो प्रमुख वी नारायणन के अनुसार, तीसरे चरण में समस्या का पता चला, जो एक ठोस रॉकेट मोटर है जो प्रक्षेपण के वायुमंडलीय चरण के बाद ऊपरी चरण को उच्च थ्रस्ट प्रदान करता है। इस चरण में अधिकतम थ्रस्ट 240 किलोन्यूटन है। यह इसरो का 101वां प्रक्षेपण था, जिसमें उन्होंने पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले उपग्रह को लॉन्च किया, जिसे ईओएस-09 के रूप में भी जाना जाता है, जिसे सूर्य तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (SSPO) में रखा जाना था।
क्या थी योजना?
ईओएस-09 उपग्रह को ऑर्बिट चेंज थ्रस्टर्स (OCT) के रूप में तैनात करने की योजना थी, जिसका उपयोग पीएस4 चरण की ऊंचाई को कम करने के लिए किया जाएगा। इसके बाद पैसिवेशन किया जाएगा, जो चरण के कक्षीय जीवन को कम करने और जिम्मेदार अंतरिक्ष संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उपाय है। EOS-09 को विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में उपयोग के लिए निरंतर और विश्वसनीय रिमोट सेंसिंग डेटा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
ChatGPT का स्मार्ट इस्तेमाल: जानिए कैसे करें कामकाज में और भी बेहतर उपयोग
विशेष रूप से, यह प्रक्षेपण स्थिरता को बढ़ावा देने और जिम्मेदार अंतरिक्ष संचालन को आगे बढ़ाने के साथ भी जुड़ा हुआ था, क्योंकि EOS-09 मिशन के बाद इसे सुरक्षित रूप से निपटाने के लिए डीऑर्बिटिंग ईंधन से लैस है।
EOS-09 एक उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है जो सी-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार तकनीक से लैस है। यह दिन या रात, सभी मौसम की स्थिति में पृथ्वी की सतह की उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें ले सकता है। यह क्षमता कई क्षेत्रों में भारत की निगरानी और प्रबंधन प्रणालियों को बढ़ाती है।
