युद्ध की आड़ में भारत में फैलाया जा रहा कट्टरपंथ, ISI की साजिश हुई बेनकाब! IB ने किया चौंकाने वाला खुलासा
IB Alert On Extremism: इंटेलिजेंस ब्यूरो ने एक बड़ा खुलासा किया है। आईबी के एक अधिकारी ने कहा है कि मिडिल ईस्ट तनाव का फायदा उठाते हुए कट्टरपंथी भारत के युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेल रहे हैं।
- Written By: सजल रघुवंशी
Protest Image In BG, AI Image, IB logo (Source: IANS, Designed Image)
Security Alert In India: ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध को एक सप्ताह हो गया है। इस ऑपरेशन में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद से स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई के रूप में पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में अमेरिका और इजरायल के हितों पर हमला किया।
युद्ध की बढ़ती हलचल के बीच भारतीय एजेंसियों को चैनलों के माध्यम से भारत के युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने के संकेत मिले हैं। उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल जैसे राज्यों में एक नए कट्टरपंथी अभियान को शुरू करने की कोशिश की चर्चा सामने आई है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो का बड़ा खुलासा
मीडिया एजेंसी आईएएनएस ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी का हवाला देते हुए बताया है कि कट्टरपंथी तत्व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए वीडियो तैयार कर रहे हैं और उन्हें प्रसारित कर रहे हैं। ये वीडियो कई भाषाओं में तैयार किए गए हैं। उदाहरण के लिए केरल के लिए वीडियो मलयालम में बनाए गए हैं, जिससे यह तत्व उस राज्य के युवाओं को लक्ष्य बना सकें। इसी तरह कश्मीर के युवाओं के लिए वीडियो कश्मीरी या कोशुर में हैं और यूपी के लिए यह हिंदी में हैं।
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मुस्लिम युवाओं को गुमराह करने की कोशिश
इन भाषाओं के अलावा, एआई का इस्तेमाल उर्दू और दूसरी भारतीय भाषाओं में कंटेंट बनाने के लिए भी किया जा रहा है। यह इस बात का इशारा है कि कट्टरपंथी तत्व युद्ध का बहाना बनाकर अपनी पहुंच बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि यह तत्व सिर्फ शिया मुसलमानों को ही नहीं, बल्कि सुन्नी को भी निशाना बना रहे हैं। अधिकारी ने आगे कहा कि इसका मकसद युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और फिर उन्हें भारत में हमले करने के लिए उकसाना है।
मेन टारगेट पर प्रार्थना सभाएं और रैलियां
अली खामेनेई की मौत के बाद केंद्र ने एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि कट्टरपंथी तत्व प्रार्थना सभाओं और एकजुटता रैलियों में घुसपैठ करके युवाओं को भड़काने की कोशिश कर सकते हैं। हैदराबाद, मुंबई, लखनऊ और दिल्ली में शिया समुदायों की ओर से शोक जुलूस निकाले जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में ऐसे और जुलूस निकाले जा सकते हैं। कट्टरपंथी तत्व इन्हीं को अपना निशाना बना सकते हैं।
कंटेंट पर भी सख्त नजर
एआई से बनाए गए वीडियो के अलावा, एजेंसियां उन इन्फ्लुएंसर्स पर भी कड़ी निगरानी रख रही हैं जो ऑनलाइन धार्मिक और सांस्कृतिक चैनल चलाते हैं। ये लोग युवाओं को भड़काने के लिए अपने संदेशों में सूक्ष्म तरीके से उकसावे वाली बातें शामिल कर सकते हैं। एजेंसियों को पता चला है कि शिया नरसंहार और उम्मा (मुस्लिम समुदाय) पर हमले जैसे मुद्दों का इस्तेमाल लोगों को कट्टरपंथी बनाने के लिए किया जा सकता है।
आईएसआईएस उठा सकता है फायदा
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस्लामिक स्टेट (ISIS) शिया के खिलाफ है लेकिन फिर भी वह इस स्थिति का फायदा उठाकर अपना एजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा। अल-कायदा जैसे संगठन भी अक्सर वैश्विक मुद्दों का इस्तेमाल अपनी विचारधारा फैलाने के लिए करते रहे हैं। ये संगठन अमेरिका और इजरायल दोनों के इस्लाम विरोधी होने के एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे। इंटेलिजेंस एजेंसियों को पता चला है कि इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा दोनों इस मुद्दे का इस्तेमाल भारत में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए करेंगे।
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आईएसआई तत्व भी शामिल
खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि युद्ध की आड़ में सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए भारत में कट्टरपंथ फैलाने की साजिश चल रही है और यह एक लंबी साजिश है। रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसआई समर्थित तत्व युवाओं को प्रभावित कर ‘लोन वुल्फ’ यानी अकेले हमला करने के लिए उकसाने की दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रहे हैं।
