इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में 22 रुपये का बड़ा उछाल (सोर्स-सोशल मीडिया)
Global Crude Oil Price Surge Impact: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए जबरदस्त उछाल ने भारतीय उद्योगों की चिंता बढ़ा दी है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है जिससे उत्पादन लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। प्रीमियम पेट्रोल के बाद अब डीजल के दामों में आई यह तेजी सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय संकट का परिणाम मानी जा रही है। यह कदम घरेलू बाजार में ऊर्जा की बढ़ती लागत को देखते हुए उठाया गया है।
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अस्थिरता के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने इंडस्ट्रियल डीजल के दामों में एक साथ 22.03 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है। यह वृद्धि अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक मानी जा रही है जो सीधे तौर पर औद्योगिक सेक्टर और बड़ी विनिर्माण इकाइयों को प्रभावित करेगी। इस फैसले के बाद फैक्ट्रियों और विनिर्माण इकाइयों के लिए ईंधन का बजट काफी बढ़ जाने की उम्मीद जताई जा रही है जिससे भविष्य में उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
कीमतों में हुए इस बड़े बदलाव के बाद इंडस्ट्रियल डीजल की दर अब 87.57 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर सीधे 109.59 रुपये प्रति लीटर के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। उपभोक्ताओं और थोक खरीदारों के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका है क्योंकि 22 रुपये से अधिक की वृद्धि एक ही बार में लागू कर दी गई है। तेल विपणन कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लागत बढ़ने के कारण उनके पास कीमतों में इजाफा करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा था।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग जैसी स्थिति ने कच्चे तेल की आपूर्ति को वैश्विक स्तर पर बाधित कर दिया है जिससे कीमतों में अचानक उछाल आया है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर है इसलिए किसी भी वैश्विक तनाव का असर यहां की कीमतों पर तुरंत देखने को मिलता है। जानकारों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और लंबा खींचता है तो आने वाले समय में ऊर्जा की कीमतों में और भी इजाफा हो सकता है जिसका व्यापक असर पड़ेगा।
इंडस्ट्रियल डीजल का उपयोग बड़ी मशीनों, जेनरेटर सेटों और भारी विनिर्माण प्रक्रियाओं में किया जाता है जिससे अब उत्पादन की कुल लागत काफी अधिक हो जाएगी। इस वृद्धि का असर परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी पड़ेगा क्योंकि लागत बढ़ने से सामानों की ढुलाई के रेट बढ़ने की पूरी संभावना है। कंपनियां अब अपने मुनाफे को बचाने के लिए उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी करने पर विचार कर सकती हैं जिससे अंततः बाजार में महंगाई बढ़ने का डर है।
विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में आए इस उछाल ने एक बार फिर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी की जा चुकी है और अब इंडस्ट्रियल डीजल का महंगा होना अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं ताकि बाजार में ईंधन की आपूर्ति को सुचारू रूप से जारी रखा जा सके और कमी न हो।
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आने वाले समय में अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम नहीं होता है तो कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। ऐसी स्थिति में तेल कंपनियां कीमतों में और भी संशोधन कर सकती हैं जो घरेलू मुद्रास्फीति को और अधिक बढ़ा सकता है और बजट बिगाड़ सकता है। फिलहाल उद्योगों को इस नई बढ़ी हुई दर के साथ ही अपना काम जारी रखना होगा और लागत कम करने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान देना होगा।