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सिंधु घाटी सभ्यता अचानक नहीं हुई खत्म; IIT वैज्ञानिकों का दावा- 164 साल के भीषण सूखे ने किया पतन

IIT Gandhi Nagar के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्नत सिंधु सभ्यता अचानक नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्षों के सूखे और खाद्यान्न संकट के कारण धीरे-धीरे नष्ट हुई। जानिए वैज्ञानिकों ने और क्या बताया।

  • By प्रतीक पांडेय
Updated On: Nov 30, 2025 | 12:15 PM

सिंधु घाटी सभ्यता, फोटो- सोशल मीडिया

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Indus Valley Civilization: भारत और पाकिस्तान में फैली उन्नत सिंधु घाटी सभ्यता के खात्मे का रहस्य आज भी बना हुआ है। आईआईटी गांधीनगर के वैज्ञानिकों ने एक नया शोध जारी किया है, जिसमें दावा किया गया है कि यह सभ्यता लगातार सूखे के प्रकोप और मौसम में बदलाव की वजह से नष्ट हुई।

आईआईटी गांधीनगर के विमल मिश्रा की अगुआई में किए गए शोध में यह पाया गया है कि सिंधु घाटी सभ्यता का पतन अचानक नहीं हुआ, बल्कि यह सैकड़ों वर्षों में धीरे-धीरे समाप्त हुई। यह सभ्यता 5000 से 3500 ईसा पूर्व तक फलती-फूलती थी, जिसके उन्नत नमूने हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल और राखीगढ़ी तक पाए गए हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस सभ्यता को लगातार सूखे का सामना करना पड़ा।

सैकड़ों साल में धीरे-धीरे हुआ सभ्यता का अंत

इससे पहले, सभ्यता के खात्मे को लेकर कई तरह के दावे किए जाते रहे हैं, जिनमें महामारी, बाढ़, भूकंप और उल्कापात जैसी बातें शामिल थीं। लेकिन नए 11 पन्नों के रिसर्च पेपर में यह दावा किया गया है कि पानी की गंभीर कमी ही पतन की मुख्य वजह थी, जिसके चलते बहुत सारे लोगों की मौत हो गई और कुछ ने पलायन कर लिया।

जलवायु परिवर्तन से कमजोर हुआ मानसून

शोध के अनुसार, सिंधु सभ्यता पूरी तरह से सिंधु नदी पर आधारित थी, जिसके पानी से वे खेती करते थे। लेकिन मानसून और मौसम की गतिविधियों में परिवर्तन की वजह से बारिश में 10 से 20 फीसदी की गिरावट आ गई। वहीं औसत तापमान 0.5 डिग्री बढ़ गया।

वैज्ञानिकों ने पाया कि लगभग दो शताब्दी तक चले सूखे ने पूरी सभ्यता को हिलाकर रख दिया। रिसर्च में सामने आया है कि 85 साल की अवधि में कम से कम चार बेहद गंभीर सूखे पड़े, और एक बार तो 164 साल का भीषण सूखा पड़ गया, जिसमें सभ्यता नष्ट हो गई। आर्कियो बोटैनिकल तथ्यों के मुताबिक, पानी की कमी के कारण लोगों ने गेहूं और अन्य मुख्य अनाजों को छोड़कर दूसरी फसलों को उगाने की कोशिश की, लेकिन वे इसमें कामयाब नहीं हो पाए।

यह भी पढ़ें: दिल्ली में बहस के बाद CISF हेड कांस्टेबल ने 17 साल के लड़के को गोली मारी; पिस्टल संग आरोपी गिरफ्तार

महासागरों का तापमान बना कारण

शोध में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन का कारण उत्तरी अटलांटिक में ठंड का बढ़ना था, जिससे भारत का मानसून कमजोर होने लगा। इसके अलावा, प्रशांत और हिंद महासागर का तापमान बढ़ने से धरती से तापमान का अंतर कम हो गया, जिससे मानसून और भी कमजोर हुआ। बारिश कम होने की वजह से नदियां भी सूखने लगीं। धीरे-धीरे आबादी कम होती गई, कृषि की बर्बादी हुई और खाद्यान्न की कमी के कारण बड़े-बड़े शहर छोटे कबीलों में बदल गए, और सभ्यता का पतन होता चला गया।

Indus valley civilization did not end suddenly iit scientists claim a 164 year drought caused its collapse

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Published On: Nov 30, 2025 | 12:13 PM

Topics:  

  • Gujrat News
  • IIT
  • Today Hindi News

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