इस ‘आसमानी अफलातून’ ने उड़ाए थे 4 अमेरिकी फाइटर जेट, भारतीय वायुसेना से चंद दिनों बाद होगा रिटायर
Mig-21 Retirement: लड़ाकू विमान मिग-21 रिटायर हो रहा है। आसमान में अपनी गर्जना से दुश्मनों को डराने वाला यह विमान 19 सितंबर को चंडीगढ़ एयरबेस से आखिरी बार लोगों को अपनी बहादुरी का परिचय देगा।
- Written By: अभिषेक सिंह
मिग-21 (सोर्स- सोशल मीडिया)
Indian Air Force Fighter Jet Mig-21: अब वो दिन दूर नहीं जब भारतीय वायुसेना का पहला सुपरसोनिक जेट फाइटर मिग-21 अपनी सेवाएं देना बंद कर देगा। कभी भारत की वीरता का प्रतीक रहा यह लड़ाकू विमान अपनी आखिरी उड़ान के लिए तैयार हो रहा है।
आसमान में अपनी गर्जना से दुश्मनों को डराने वाला यह विमान 19 सितंबर को चंडीगढ़ एयरबेस से आखिरी बार लोगों को अपनी बहादुरी का परिचय देगा। इस लड़ाकू विमान के बारे में सेवानिवृत्त एयर मार्शल ने कहा कि यह कोई उड़ता हुआ ताबूत नहीं था, इसने एक बार चार अमेरिकी लड़ाकू विमानों को धूल चटाई थी।
मिग-21 ने कभी नहीं किया निराश
भारतीय वायुसेना से रिटायर्ड एयर मार्शल पृथ्वी सिंह बरार ने एक अखबार को बताया कि मिग-21 के कारनामों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक मशीन से कहीं बढ़कर था। मुझे मिग-21 बहुत पसंद है, इसने हमें ऑपरेशन में कभी निराश नहीं किया।
सम्बंधित ख़बरें
NDA 2 Recruitment 2026: डिफेंस सेक्टर में 394 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, जानें योग्यता से लेकर चयन प्रक
AFCAT Recruitment: वायुसेना में करियर बनाने का सुनहरा मौका, 300 से ज्यादा पदों पर निकली भर्ती, ऐसे करें अप्लाई
आसमान की मास्टर बनीं स्क्वाड्रन लीडर सान्या, वायुसेना में रचा इतिहास; नए लड़ाकू पायलटों को देंगी ट्रेनिंग
दुश्मनों की नींद उड़ाने की तैयारी! वायुसेना को मिलेंगे 114 नए फाइटर जेट, 3.3 लाख करोड़ का मेगा प्लान तैयार
चंडीगढ़ के ऊपर उड़ाया था जेट
उन्होंने आगे कहा कि जब भी आप कोई विमान उड़ाते हैं, तो आपको वह बहुत पसंद आता है। 86 वर्षीय पृथ्वी सिंह बरार ने 1966 में चंडीगढ़ के ऊपर जेट उड़ाया था और 2000 में सेवानिवृत्त हुए। अपनी सेवानिवृत्ति से दो दिन पहले, उन्होंने मिग-21 भी उड़ाया था।
अभिनंदन ने मार गिराया था F-16
मिग-21 की सेवाओं और वीरता का ज़िक्र करते हुए, सेवानिवृत्त एयर मार्शल पृथ्वी सिंह बरार ने कहा कि इस विमान ने 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में दुश्मन देश के विमानों को धूल चटाई थी। इसके अलावा, इसने 1999 के कारगिल युद्ध में भी हिस्सा लिया था, साथ ही 2019 में अभिनंदन ने इसी लड़ाकू विमान से एक पाकिस्तानी F-16 को मार गिराया था।
1971 की लड़ाई में शामिल था मिग-21
बरार ने इस विमान को ‘उड़ता ताबूत’ कहने से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि लड़ाकू पायलटों ने इस विमान को कभी इस नज़र से नहीं देखा था। बता दें कि 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, बरार ने अमृतसर से पाकिस्तान की सीमा तक मिग-21 उड़ाया था और उन्हें अपनी जान और इस विमान पर पूरा भरोसा था।
1960 के दशक में आया था मिग-21
मिग-21 के भारत आगमन को याद करते हुए बरार ने बताया कि पाकिस्तान ने पहला सुपरसोनिक अमेरिकी स्टार फाइटर खरीदा था। पड़ोसी देश के पास यह विमान होने से भारत काफी तनाव में था। इसके बाद भारत ने रूस से संपर्क किया और फिर 1960 के दशक की शुरुआत में मिग-21 आया और इसके साथ ही सैन्य क्षेत्र में भारत की ताकत और बढ़ गई।
यह भी पढ़ें: समंदर का ‘सिकंदर’ बनेगा भारत! पाताल में भी दुश्मन की पनडुब्बी बर्बाद कर देगा DRDO का ‘महाकाल’
बरार 1966 में मिग-21 पर प्रशिक्षित भारतीय पायलटों के पहले बैच में शामिल थे और नंबर 1 स्क्वाड्रन अपनी ज़रूरतों और परिस्थितियों के अनुसार खुद को संचालित करने के लिए प्रशिक्षित करने वाली पहली स्क्वाड्रन बनी।
