नरेंद्र मोदी, डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स - सोशल मीडिया)
India-US Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जहां सरकार इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत बता रही है, वहीं कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा प्रहार करते हुए इसे अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण करार दिया है।
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा एलान करते हुए भारत और अमेरिका के बीच एक नए व्यापार समझौते की पुष्टि की। ट्रंप के अनुसार, इस समझौते के तहत अमेरिका, भारत से आने वाले सामानों पर लगने वाले पारस्परिक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा।, यह महत्वपूर्ण घोषणा ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर हुई विस्तृत बातचीत के बाद सार्वजनिक की।
इस फैसले पर प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए इसे भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैक्स कम होने से भारतीय व्यापार को मजबूती मिलेगी और दोनों देशों के आर्थिक संबंध नए आयाम छुएंगे।, हालांकि, इस घोषणा के तुरंत बाद विपक्षी खेमे में नाराजगी और तंज का सिलसिला शुरू हो गया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने इस समझौते को लेकर मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने 1987 की प्रसिद्ध फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ के संवाद का सहारा लेते हुए कहा कि “वॉशिंगटन में तो साफ है कि मोगैम्बो खुश है।” रमेश का तर्क है कि यह समझौता किसी भी तरह से ‘फादर ऑफ ऑल डील्स’ जैसा नहीं दिखता है, जैसा कि इसे पेश करने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी अब पूरी तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निर्भर हो गए हैं। जयराम रमेश ने यहाँ तक कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पीएम मोदी ने अंततः अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने झुकने का फैसला कर लिया है। विपक्षी पार्टी ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि आखिर भारत सरकार अपनी नीतियों की जानकारी खुद देने के बजाय अमेरिका की घोषणाओं का इंतजार क्यों करती है?
कांग्रेस ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि भारत से जुड़े बड़े रणनीतिक और व्यापारिक फैसलों की जानकारी भारत सरकार के बजाय वाशिंगटन से आ रही है।, जयराम रमेश ने याद दिलाया कि यह पहली बार नहीं है; इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर, रूस और वेनेजुएला से तेल खरीदने के फैसले और अब इस ट्रेड डील की खबर भी ट्रंप ने ही साझा की है।
इतना ही नहीं, भारत में अमेरिकी राजदूत द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी ने भी आग में घी डालने का काम किया। कांग्रेस का कहना है कि यह अब एक तरह की परंपरा बन गई है कि भारतीय जनता को अपनी सरकार के निर्णयों के बारे में पहले अमेरिकी अधिकारियों से पता चलता है, जो देश की संप्रभुता और विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस नेता ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास प्रधानमंत्री मोदी पर किसी न किसी तरह का दबाव या लीवरेज (Leverage) है। रमेश ने टिप्पणी की कि अब स्थिति ऐसी है कि पीएम मोदी न तो ट्रंप के साथ सार्वजनिक रूप से दिखना चाहते हैं और न ही उनके बीच पहले जैसा दोस्ताना व्यवहार नजर आता है।
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विपक्ष ने सवाल उठाया है कि अगर यह डील वाकई भारत के लिए इतनी बड़ी उपलब्धि थी, तो इसकी घोषणा भारत की ओर से क्यों नहीं की गई? रमेश ने इसे ‘ट्रंप-निर्भरता’ का नाम दिया और सरकार की भूमिका को कमजोर बताया।
कांग्रेस की नाराजगी का एक कारण हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता भी है, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा गया था। पार्टी का तर्क है कि अमेरिका के साथ हुआ यह वर्तमान समझौता उस स्तर का नहीं है, फिर भी सरकार इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर रही है।