

Rajnath Singh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन का दौरा किया और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को श्रद्धांजलि दी। अपने दौरे के दौरान, रक्षा मंत्री ने शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर भी किए। राजनाथ सिंह ने यह जानकारी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में शेयर की।
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में राजनाथ सिंह ने लिखा, "बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और BNP अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए नई दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन का दौरा किया और शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। हमारी प्रार्थनाएं उनके परिवार और बांग्लादेश के लोगों के साथ हैं।"
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का मंगलवार सुबह 6 बजे ढाका में निधन हो गया। वह 80 साल की थीं और कुछ समय से बीमार थीं। उन्हें बुधवार को बांग्लादेश में संसद परिसर में राजकीय सम्मान के साथ उनके दिवंगत पति जियाउर रहमान की कब्र के बगल में दफनाया गया।
भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर अंतिम संस्कार में शामिल हुए और उन्हें श्रद्धांजलि दी। डॉ. जयशंकर ने ढाका में खालिदा जिया के बेटे और BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से भी मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हस्ताक्षरित शोक पत्र सौंपा।
गौरतलब है कि बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के सत्ता से हटने के बाद से हिंसा और अराजकता का माहौल है। अल्पसंख्यक समुदायों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। भारत ने इस संबंध में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
इसके इतर बांग्लादेश में युनुस की सरकार आने के बाद से भारत विरोधी भावना भी बढ़ रही है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में कुछ तनाव आया है। इस बीच पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। जिससे वह बांग्लादेश का इस्तेमाल कर भारत में घटिया हरकतों को अंजाम दे सके।
यही वजह है कि खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए विदेश मंत्री का ढाका दौरा और गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देने के लिए राजनाथ सिंह का बांग्लादेश हाई कमीशन का दौरा एक बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
आने वाले चुनाव में हो सकता है कि बीएनपी सत्ता में वापसी करे। ऐसे में खालिदा जिया को 'श्रद्धांजलि' के बहाने भारत ने अपनी तरफ बांग्लादेश से संबंध बेहतर करने का संदेश दे दिया है। यदि यह 'श्रद्धांजलि डिप्लोमेसी' कामयाब रही तो पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होगी।