पड़ोसियों का संकटमोचक बना भारत, पहले बांग्लादेश-श्रीलंका को भेजा हजारों लीटर तेल, अब इन देशों ने भी मांगी मदद
India दक्षिण एशिया के लिए 'संकटमोचक' बनकर उभरा है। बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों को ईंधन आपूर्ति कर भारत ने क्षेत्रीय स्थिरता और अपनी सॉफ्ट पावर को मजबूत किया है।
- Written By: अक्षय साहू
भारत की तेल डिप्लोमेसी (सोर्स- सोशल मीडिया)
India Energy Diplomacy: भारत ने हाल के वर्षों में यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि अपने पड़ोसी देशों के लिए एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साझेदार भी है। वैश्विक ऊर्जा संकट और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने “संकटमोचक” की भूमिका निभाते हुए क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा दी है।
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयानों में यह दोहराया गया है कि भारत दक्षिण एशिया के देशों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत न केवल पहले से किए गए समझौतों का पालन कर रहा है, बल्कि जरूरत के समय अतिरिक्त सहायता भी प्रदान कर रहा है।
बांग्लादेश और श्रीलंका को भेजी मदद
ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश और श्रीलंका को भारत ने त्वरित राहत पहुंचाई है। मार्च में भारत ने बांग्लादेश को 22,000 लीटर हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति की, जिससे वहां बिजली और परिवहन व्यवस्था को स्थिर रखने में मदद मिली। वहीं, गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका को अब तक 38,000 मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद भेजे गए हैं, जिसने उसकी अर्थव्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सम्बंधित ख़बरें
‘डबल रोल’ में दिखेंगे श्रेयस अय्यर! टीम इंडिया की कप्तानी के साथ-साथ निभाएंगे कोच की भूमिका, हुआ बड़ा एलान
अपने ही बयान में फंसे नेपाली PM बालेन शाह! भारत के सख्त रुख के बाद बैकफुट पर काठमांडू? Video
खान सर जाएंगे जेल? फायरिंग मामले में आर्म्स एक्ट के तहत FIR दर्ज, पटना पुलिस कभी भी कर सकती है अरेस्ट
ट्रंप-पुतिन दोनों को चाहिए पीएम मोदी का साथ! भारत से नजदीकी बढ़ाने के पीछे क्या है महाशक्तियों की मजबूरी?
नेपाल और भूटान के साथ गहरे रिश्ते
भारत के नेपाल और भूटान के साथ ऊर्जा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है। नेपाल के साथ विशेष समझौते के तहत पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति जारी है, जबकि भूटान की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा भारत द्वारा पूरा किया जाता है, जिससे वहां विकास की गति बनी रहती है।
मालदीव ने मांगा ऊर्जा आपूर्ति में सहयोग
भारत का प्रभाव अब समुद्री क्षेत्र में भी बढ़ रहा है। मॉरीशस के साथ भारत सरकार ‘सरकार-से-सरकार’ (G2G) समझौते के तहत सीधे ईंधन आपूर्ति की दिशा में काम कर रही है। इसके अलावा मालदीव और सेशेल्स ने भी भारत से ऊर्जा सहयोग की मांग की है, जिस पर सकारात्मक विचार चल रहा है।
यह भी पढ़ें- किसी को अपना यूरेनियम नहीं देंगे…ईरान ने ट्रंप के दावे को बताया फर्जी, कहा- यह हमारा अधिकार
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की यह रणनीति केवल सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में अपनी “सॉफ्ट पावर” को मजबूत करने का भी प्रयास है। जहां चीन पर अक्सर कर्ज के जरिए प्रभाव बढ़ाने के आरोप लगते हैं, वहीं भारत बुनियादी जरूरतों जैसे ईंधन और बिजली की आपूर्ति कर एक विश्वसनीय भागीदार की छवि बना रहा है।
