अब दुश्मनों की खैर नहीं, भारत ला रहा सबसे बड़ा मिलिट्री स्पेस प्रोग्राम, अप्रैल में होगा शुरू
Defense Strategy: यह प्रोजेक्ट 26 हजार करोड़ का है। जो सबसे बड़ा मिलिट्री स्पेस प्रोग्राम माना जा रहा। यह स्पेस बेस्ड सर्विलांस फेज-3 प्रोग्राम का हिस्सा है। पहला सैटेलाइट अप्रैल में लॉन्च होगा।
- Written By: रंजन कुमार
भारत का मिलिट्री स्पेस प्रोग्राम। इमेज-एआई
Advanced Surveillance Satellites: भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा प्रणाली को और मजबूत करना शुरू किया है। अब भारत सरकार दुश्मन की हर गतिविधियों पर 24 घंटे पैनी नजर रखने की तैयारी कर रही। इसके लिए 52 एडवांस्ड सर्विलांस सैटेलाइट लॉन्च करने का प्लान है।
यह प्रोजेक्ट 26 हजार करोड़ का है। इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री स्पेस प्रोग्राम माना जा रहा। यह स्पेस बेस्ड सर्विलांस फेज-3 प्रोग्राम का पार्ट है। अफसरों के अनुसार पहला सैटेलाइट अप्रैल तक लॉन्च हो सकता है। इन सैटेलाइट में अत्याधुनिक इंफ्रारेड सेंसर लगेंगे। जो अंधेरे में, बादलों और खराब मौसम में भी साफ फोटो लेने में सक्षम होंगे।
क्या होगी इन सैटेलाइट्स की खासियत?
इन सैटेलाइ की खासियत होगी कि ये दिन-रात और हर मौसम में निगरानी कर सकेंगे। मिक्स्ड सेंसर सिस्टम की मदद से भारत जमीनी सीमाओं और समुद्री तटरेखा पर लगातार इंटेलिजेंस जुटा सकेगा। इससे सेना को दुश्मन की गतिविधियों पर रियल टाइम जानकारी मिलेगी। किसी खतरे पर तुरंत प्रतिक्रिया देना आसान होगा।
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ISRO की अहम भूमिका
इस प्रोजेक्ट में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की अहम भूमिका होगी। इसरो 21 सैटेलाइट बनाएगा। प्राइवेट कंपनियों द्वारा 31 सैटेलाइट बनाए जाएंगे। किसी भारतीय मिलिट्री स्पेस प्रोग्राम में पहली बार प्राइवेट सेक्टर की इतनी बड़ी भागीदारी होगी। सैटेलाइट के ऑपरेशनल होने के बाद उनकी कमान डिफेंस स्पेस एजेंसी के पास रहेगी। ये सैटेलाइट अलग-अलग ऑर्बिट में तैनात होंगे। इससे अहम क्षेत्रों की पूरी कवरेज सुनिश्चित की जा सकेगी।
किन चीजों पर मदद मिलेगी?
इस प्रोजेक्ट को ऑपरेशन सिंदूर के बाद गति मिली है। ऑपरेशन सिंदूर ने स्पष्ट किया कि आधुनिक युद्ध में सैटेलाइट से मिलने वाली खुफिया जानकारी कितनी आवश्यक है। नई सैटेलाइट आने से किसी क्षेत्र पर दोबारा नजर डालने का वक्त कम हो जाएगा। इससे दुश्मन की सैन्य गतिविधियों, बुनियादी ढांचा और नौसैनिक गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो जाएगा।
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एआई से होगा लैस
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से यह सैटेलाइट खुद खतरों की पहचान कर सकेंगे। जरूरी फोटो को कैप्चर करेंगी। सैटेलाइट में ही डेटा प्रोसेसिंग होने के चलते ग्राउंड स्टेशनों पर निर्भरता घट जाएगी। सेना को रियल टाइम अलर्ट मिलने में मदद मिलेगी। यह प्रोजेक्ट भारत की ताकत को नई ऊंचाई देगा। देश की सुरक्षा को और मजबूत कर देगा।
