Explainer: अंतरिक्ष में भारत की नई छलांग, श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ विक्रम-1, बना देश का पहला निजी रॉकेट
Rocket Vikram 1 Launched: हैदराबाद स्थित श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से भारत आज अपना पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' लॉन्च कर दिया है। जानें यह अंतरिक्ष में क्या करेगा काम?
- Written By: अमन उपाध्याय
श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ 'विक्रम-1, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Mission Aagman Rocket Vikram 1 Launch: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस आज अपने पहले ऑर्बिटल Mission Aagaman के तहत ‘विक्रम-1’ रॉकेट को लॉन्च किया गया।
यह लॉन्चिंग आज सुबह 12:05 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से हुई है। यह मिशन न केवल स्काईरूट के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए एक मील का पत्थर है क्योंकि यह सरकारी नेतृत्व से हटकर उद्योग-आधारित अंतरिक्ष अभियानों की दिशा में एक बड़ा कदम है।
विक्रम-1 की क्या है खासियत?
विक्रम-1 भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका ढांचा है, जिसे पूरी तरह से ‘ऑल-कार्बन कंपोजिट’ सामग्री से बनाया गया है। यह सामग्री पारंपरिक स्टील की तुलना में काफी हल्की और अधिक मजबूत होती है, जिससे रॉकेट का प्रदर्शन और पेलोड क्षमता बढ़ जाती है।
सम्बंधित ख़बरें
Lalu Yadav Health: तबीयत बिगड़ने पर पटना IGIMS से लालू यादव को दिल्ली AIIMS किया गया रेफर
iQOO Z11 Lite की भारत में एंट्री 24 जुलाई को, 20 हजार से कम कीमत में मिलेगा 6500mAh बैटरी वाला फोन
EPFO Vishwas 2026: ईपीएफओ ने 6 महीने के लिए लॉन्च की नई स्कीम, पीएफ विवादों का होगा जल्द निपटारा
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पर बड़ा अपडेट: 2027 में शुरू होगा पहला सेक्शन, जापान से मिलेगी E20 ट्रेन
इसके अलावा, इस रॉकेट में भारत का पहला 100 प्रतिशत 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो इसके ‘ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल’ को शक्ति प्रदान करता है।
#WATCH | Andhra Pradesh: India’s first privately developed orbital-class rocket, Vikram-1, launched from the Satish Dhawan Space Centre in Sriharikota Built by Hyderabad-based Skyroot Aerospace, Vikram-1 is powered by three solid-fuel stages and a liquid orbital adjustment… pic.twitter.com/QQC9CPjcxH — ANI (@ANI) July 18, 2026
विक्रम-1 का क्या होगा काम?
मिशन ‘आगमन’ केवल उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की चुनौतियों का समाधान भी पेश करता है। इस रॉकेट के साथ ‘एम्ब्रेस’ मिशन को लेकर गयाहै, जो रोबोटिक आर्म तकनीक के जरिए अंतरिक्ष में जमा मलबे को हटाने का प्रदर्शन करेगा।
निजी क्षेत्र द्वारा इस तरह का परीक्षण भारत में पहली बार किया जा रहा है। साथ ही, इसमें इस्तेमाल किया गया पहला चरण भारत का सबसे लंबा ‘मोनोलिथिक कार्बन कंपोजिट’ रॉकेट स्टेज है, जो स्वदेशी इंजीनियरिंग की ताकत को दर्शाता है।
रॉकेट विक्रम 1 इन्फोग्राफिक, फोटो- AI
विक्रम-1 का मिशन इसलिए भी है खास?
यह मिशन कूटनीतिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। ‘विक्रम-1’ अपने साथ एक छोटा स्वर्ण रॉकेट ले जा रहा है जिसमें भारतीय विज्ञान के दिग्गजों डॉ. विक्रम साराभाई, सर सीवी रमन और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की सूक्ष्म कलाकृतियां स्थापित हैं। इसके अलावा, बेंगलुरु में विकसित किया गया प्रयोगशाला में निर्मित हीरा ‘कॉस्मिक ब्लूम’ भी इस मिशन का हिस्सा है।
किसके नाम पर पड़ा विक्रम-1?
‘विक्रम-1’ रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। डॉ. साराभाई ने भारत के अंतरिक्ष मिशन की बुनियाद रखी और देश के स्पेस प्रोग्राम को नई दिशा दी। उनके अमूल्य योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट का नाम ‘विक्रम-1’ रखा है।
LIFT-OFF! 🚀 Vikram-1 has left the pad at Sriharikota. India's first privately developed orbital rocket is flying. History is being made. 🇮🇳 #Vikram1 #JourneyToOrbit #SkyrootAerospace — Skyroot Aerospace (@SkyrootA) July 18, 2026
PM मोदी के किस संदेश को लेकर जा रहा अंतरिक्ष?
सबसे खास बात यह है कि मिशन ‘आगमन’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुभकामना संदेश ‘वंदे मातरम’ को भी अंतरिक्ष में ले जा रहा है। यह संदेश भारत की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को देश के नागरिकों की आकांक्षाओं से प्रतीकात्मक रूप से जोड़ता है।
यह भी पढ़ें:- सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में भर्ती, पत्नी ने कहा मेडिकल ट्रीटमेंट से पहले परिवार की सहमति जरूरी
इसके साथ ही, रॉकेट में उन्नत ‘न्यूमैटिक सेपरेशन सिस्टम’ का उपयोग किया गया है जो पेलोड को बिना किसी झटके के अलग करने में मदद करता है यह तकनीक भारतीय निजी रॉकेटों में पहली बार देखी जा रही है। आज की यह सफल लॉन्चिंग वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में भारत की हिस्सेदारी को कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखती है।
