

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन फीका रहा लेकिन इसके बावजूद एनडीए सरकार बनाने में सफल रही। लोकसभा चुनाव में भाजपा के खराब प्रदर्शन की बड़ी वजह उसके और संघ के बीच मतभेद को माना जा रहा है। ऐसे में अब भाजपा कही ना कही ये समझ चुकी है कि आरएसएस से पंगा विधानसभा चुनाव में भी उसके लिए घातक साबित हो सकता है। संघ से मतभेद के बीच भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में ताल ठोकने की रणनीति बनाने के लिए हाई लेवल मीटिंग करने जा रही है। ऐसे में अब चुनावी रणनीति कैसे बनेगी? यह बड़ा सवाल है।
शायद यही कारण है कि मतभेद के बावजूद एक हाई लेवल मीटिंग का आयोजन किया जा रहा है जिससे विधानसभा चुनाव में ताल ठोकने की रणनीति तैयार की जा सके, लेकिन इन सबके बीच लोकसभा में बीजेपी का खराब प्रर्दशन संघ को सोचने पर मजबूर कर चुका है क्योंकि जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश में बीजेपी का हाल रहा ये सबसे बड़ा चिंता का विषय रहा है।
लोकसभा के नतीजो के बाद अब संघ विधानसभा को लेकर सक्रिय होती हुई नजर आ रही है जिसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सर्वोच्च बैठक 12 जुलाई से 14 जुलाई के बीच झारखंड की राजधानी रांची में होने जा रही है। इस बैठक में आरएसएस के सर्वोच्च पदाधिकारी सरसंघचालक मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबोले के अलावा अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
हाई लेवल इस बैठक का आयोजन रांची में होना है, जिसको लेकर सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हो रहा है कि रांची में ही क्यों? इसका जवाब है कि इस साल झारखंड के साथ-साथ महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। अगले साल जनवरी-फरवरी में दिल्ली और अंत में बिहार में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। माना जा रहा है कि बैठक में इन चुनावों पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि संघ परिवार इसे संगठन की वार्षिक गतिविधियों का जायजा लेने के लिए आयोजित एक सामान्य गतिविधि बताता है।
लोकसभा चुनाव में बीजेपी एक आत्मविश्वास के साथ आई थी जिसमें सबसे बड़ा योगदान राम मंदिर का था लेकिन (फैजाबाद) अयोध्या से हार के बाद बीजेपी और संघ इस सोंच में तो जरूर पड़ गई है कि लोकसभा चुनाव में राम असरदार नहीं हुए, जिसके लिए अब बीजेपी राम का इस्तमाल विधानसभा में पूरी तरह से करना चाहेगी। इसके साथ ही संघ के लिए यह भी आत्मचिंतन का विषय है कि राम मंदिर निर्माण और उसके ऐतिहासिक उद्घाटन के बाद भी उत्तर प्रदेश की जनता ने भाजपा को बड़े पैमाने पर नकार दिया। बीजेपी के साथ-साथ यह हार संघ परिवार के लिए भी बड़ा झटका है जो राम के नाम के सहारे पूरे हिंदू समाज को एकजुट करने की कोशिश कर रहा था। तो क्या अब संघ राम को लेकर कोई अलग चुनावी ऐजेंडा तैयार करने वाली है या फिर इसके लिए कोई और रणनीति तैयार होगी।
लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए ओवर कॉन्फिडेंस खतरा का विषय बना। यहीं कारण है कि जीत की चाह में अंधी हो चुकी बीजेपी ने संघ को नजरअंदाज किया और उसके लिए टिप्पणी कर दी। लेकिन अब जब बीजेपी के दिग्गज उस छण को याद करते होंगे तो निसंदेह ही उस क्षण को कोसते होंगे। हलांकि चुनाव परिणाम के बाद जिस तरह से संघ परिवार के कुछ नेताओं ने भाजपा पर हमला बोला है, उससे बहुत कुछ पता चलता है। खैर इन विवाद के बीच संघ परिवार के मुखिया मोहन भागवत ने भी केंद्र में तीसरी बार सरकार बनाने को महत्वपूर्ण सफलता बताकर तथाकथित मतभेद की खबरों को कम करने की कोशिश की। लेकिन इससे सवाल खत्म नहीं हुए।