Ganderbal Terror Attack: आतंकी हमले के बाद सेना का सर्चिंग अभियान जारी, लश्कर ने ली जिम्मेदारी

कश्मीर के गांदरबल में आतंकियों ने सात लोगो की हत्या कर दी है। जिसके बाद सेना ने इलाकें में सर्च अभियान शुरू कर दिया है, गांदरबल में हुई आतंकी वारदात का जिम्मा लश्कर ने लिया है।
जम्मू-कश्मीर: कुलगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी
प्रतीकात्मक चित्र (सोर्स-सोशल मीडिया)
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नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में नई सरकार के गठन के बाद से आतंकी घुसपैठ तथा आतंकी हमलों में इज़ाफ़ा होता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति शासन हटने के बाद से अब सीएम ही सुप्रीमो है और ज्यादातर फैसले लेने के लिए वें स्वतंत्र है। कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से आतंकी गतिविधियों का इनपुट सेना को लगातार मिल रहा है।

ताज़ा घटना की बात करें तो कश्मीर के गांदरबल में आतंकियों ने 7 लोगो की हत्या कर दी है, इनमे एक डॉक्टर भी शामिल है। इस हमले की जिम्मदारी आतंकी संगठन लश्कर ए तैय्यबा द्वारा लिए जाने की बात सामने आई है, इसके बाद सेना ने क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में सर्च अभियान शुरू कर दिया है।

कश्मीर में कायम शांति चुनाव के बाद खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। आतंकियों द्वारा की जा रही हत्याए टारगेट किलिंग जैसे पैटर्न की ओर इशारा कर रही है, हालांकि सुरक्षा एजेंसियो द्वारा हर गतिविधि पर नज़र रखी जा रही है। गांदरबल में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी लश्कर ने ली है, जिससे यह साफ हो गया है कि कश्मीर में अब आतंक परस्त ताकतें फिर से सर उठाने लगी है।

सेना ने अपने सर्च अभियान के दौरान गांदरबल से लगभग 55 किलोमीटर दूर बारामुला में एक आतंकी को मार गिराया है। बताया जा रहा है, कि मारे गए आतंकी के पास से भारी मात्रा में हथियार तथा गोला-बारूद बरामद किया गया है। जिसके बाद एक बार फिर आतंकियों को लोकल सपोर्ट मिलने की बात उठने लगी है।

इस हमले में आतंकियों ने पंजाब और बिहार के मजदूरों को निशाना बनाया गया है। इसके पीछे आतंकियों का मकसद क्या था और उन्होंने एक ही समूह को निशाना क्यों बनाया है, यह सभी सवाल भी जांच का विषय बने हुए है। सुरक्षाबलों द्वारा हर एक एक्टिविटी पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।

इस आतंकी घटना पर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी शोक व्यक्त करते हुए हमले की कड़ी नींदा की है। आतंकी घटनाओं की एकाएक शुरुआत से कश्मीर के लोग सिहर उठे है, क्योंकि चुनाव के पहले तक यहां सेना ने शांति कायम कर रखी थी और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ था। लेकिन राष्ट्रपति शासन के हटते ही इस तरह की घटनाये फिर से सामने आने लगी है।

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